अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता के दौरान एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को आशंका थी कि इजराइल बातचीत में शामिल ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ को निशाना बना सकता है। इसी वजह से अमेरिका ने अपने मध्य-पूर्वी सहयोगी देशों के जरिए ईरान को सतर्क रहने का गुप्त संदेश भेजा।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन को डर था कि यदि दोनों वरिष्ठ नेताओं की हत्या हो जाती, तो अमेरिका-ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता और युद्धविराम की पूरी प्रक्रिया टूट सकती थी। उस समय दोनों देशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव कम करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की कोशिशें जारी थीं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान में प्रस्तावित एक बैठक से पहले भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर हमले का खतरा था। सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान ने ईरानी विमान को फाइटर जेट की सुरक्षा में इस्लामाबाद तक पहुंचाया। वापसी के दौरान भी सुरक्षा अलर्ट मिलने पर विमान की मशहद में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई और प्रतिनिधिमंडल को सड़क मार्ग से तेहरान भेजा गया।
पिछले 24 घंटे के बड़े अपडेट
- कतर ने संकेत दिए हैं कि खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की वार्ता हो सकती है।
- ईरान ने इजराइल पर अपने शीर्ष नेता को धमकी देने का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज कराई है।
- अंतिम संस्कार से पहले ईरान हाई अलर्ट पर है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
- ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- ईरान ने फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों पर IAEA निरीक्षकों के प्रवेश पर रोक लगा दी है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब मध्य-पूर्व में तनाव लगातार बना हुआ है और दुनिया की नजरें अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच होने वाले अगले घटनाक्रम पर टिकी हैं।