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भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास, 86-11 वोट से मिली मंजूरी

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भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास, 86-11 वोट से मिली मंजूरी
The US Senate has passed a bill that could impose tariffs of up to 100% on countries including India that purchase Russian oil. The bill still needs approval from the House of Representatives and President Trump before becoming law.

अमेरिकी सीनेट ने भारत समेत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाले एक बिल को 86-11 के भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। इस बिल का उद्देश्य रूस की तेल से होने वाली कमाई पर दबाव बनाना और उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर करना है। हालांकि, अभी यह कानून नहीं बना है। इसे पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिलनी बाकी है।

भारत समेत 5 देशों पर लग सकता है 100% टैरिफ

प्रस्तावित कानून के तहत भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। इन देशों को रूस से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने के कारण निशाने पर रखा गया है।

इस प्रस्ताव को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के सांसदों का समर्थन मिला। सीनेट में 86 सांसदों ने इसके पक्ष में वोट किया, जबकि 11 सांसदों ने विरोध में मतदान किया।

पहले 500% टैरिफ का था प्रस्ताव

रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई को लेकर 23 जुलाई को यह प्रस्ताव सामने आया था। शुरुआती मसौदे में 500% तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर अधिकतम 100% कर दिया गया।

अगर यह बिल कानून बनता है, तो रूस से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिकी आर्थिक दबाव काफी बढ़ सकता है।

अभी कानून बनने के लिए दो और चरण बाकी

सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद बिल अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाएगा। वहां इसे मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास भेजा जाएगा।

ट्रम्प की मंजूरी और हस्ताक्षर के बाद ही यह कानून लागू हो सकेगा। इसलिए फिलहाल भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है।

ईरान से कारोबार करने वाली कंपनियों पर भी बढ़ सकता है दबाव

इस प्रस्ताव में ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने का प्रावधान भी शामिल है। अगर कानून बनता है तो 1996 का ईरान प्रतिबंध कानून 2031 तक बढ़ाया जा सकता है।

यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का रास्ता खोलता है जो ईरान के साथ कुछ तरह का कारोबार करती हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति को 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार

प्रस्तावित कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगाने की अतिरिक्त शक्ति देने की बात भी शामिल है। यह अधिकार पांच साल तक लागू रह सकता है।

इसका मतलब है कि भविष्य में रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों और कंपनियों पर अमेरिका और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक रहा है। अगर अमेरिका भारत पर अतिरिक्त 100% टैरिफ लगाता है, तो भारतीय कंपनियों से अमेरिका जाने वाले सामान की लागत काफी बढ़ सकती है।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत पर वास्तव में कितना टैरिफ लगेगा, क्योंकि बिल को प्रतिनिधि सभा से मंजूरी और राष्ट्रपति की अंतिम स्वीकृति मिलना बाकी है।

रूस पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी कोशिश

अमेरिका और उसके सहयोगी देश रूस की ऊर्जा आय को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। रूस की तेल बिक्री से होने वाली कमाई उसके लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसी वजह से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भी दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है।

अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार, रूसी तेल की खरीद और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

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