Home आज की ख़ास ख़बर नेपाल बाढ़ में 97 साल की गुना माया की जिंदगी बची, मलबे से निकलीं तो बार-बार पूछने लगीं- पानी ने मुझे क्यों मारा?

नेपाल बाढ़ में 97 साल की गुना माया की जिंदगी बची, मलबे से निकलीं तो बार-बार पूछने लगीं- पानी ने मुझे क्यों मारा?

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नेपाल बाढ़ में 97 साल की गुना माया की जिंदगी बची, मलबे से निकलीं तो बार-बार पूछने लगीं- पानी ने मुझे क्यों मारा?
नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बाद मलबे में फंसी 97 वर्षीय गुना माया बोहरा को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया।

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। घर, सड़कें और पुल बहने के साथ हजारों लोग लापता हैं। इस त्रासदी के बीच नुवाकोट जिले से सामने आई 97 साल की गुना माया बोहरा की कहानी लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण बनी हुई है। बुजुर्ग देखभाल केंद्र के मलबे में फंसी गुना माया को जिंदा बाहर निकाल लिया गया।

गुना माया नुवाकोट के देविघाट इलाके में नदी के पास स्थित बुजुर्ग देखभाल केंद्र में रहती थीं। बाढ़ आने के समय वह केंद्र की निचली मंजिल पर अपने कमरे में थीं। अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव परिसर में पहुंच गया। हालात इतने खराब हो गए कि पूरा इलाका मलबे से ढक गया।

परिवार और स्थानीय लोगों को जब उनके वहां फंसे होने की जानकारी मिली तो उन्होंने राहत दल के साथ मिलकर उनकी तलाश शुरू की। भारी मलबे के कारण सामान्य तरीके से बचाव करना मुश्किल था। इसके लिए मशीनों की मदद लेनी पड़ी।

मलबे के नीचे मिली जिंदगी की उम्मीद

कई घंटे तक तलाश चलने के बाद बचाव दल को गुना माया के जिंदा होने का संकेत मिला। उनके परिजनों ने भी उनकी हलचल महसूस की। इसके बाद सेना, पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर उन्हें मलबे से बाहर निकालने का अभियान शुरू किया।

रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें कई घंटे मलबे और कीचड़ में फंसे रहने के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। रेस्क्यू के दौरान उन्हें मशीन के जरिए सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। उनकी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह घटना नेपाल में राहत और बचाव की कोशिशों की एक बड़ी मिसाल बन गई।

अस्पताल पहुंचने के बाद भी सदमे में हैं गुना माया

रेस्क्यू के बाद गुना माया को इलाज के लिए काठमांडू के बीर अस्पताल ले जाया गया। उनकी उम्र काफी ज्यादा है और बाढ़ की घटना का असर उनके व्यवहार पर भी दिखाई दे रहा है।

परिजनों के मुताबिक, वह घटना के बाद बहुत कम बोल रही हैं। उनके मुंह से बार-बार एक ही सवाल निकलता है—आखिर पानी ने उन्हें क्यों अपनी चपेट में लिया? परिवार के लोग उन्हें समझाने की कोशिश करते हैं कि पहाड़ी इलाके में अचानक आई बाढ़ ने ऐसा किया, लेकिन कुछ समय बाद वह फिर वही सवाल दोहराने लगती हैं।

गुना माया की जिंदगी में परिवार की भूमिका भी खास रही है। उनके अपने बच्चे नहीं थे, लेकिन उन्होंने पति के परिवार के कई बच्चों को अपने बच्चों की तरह पाला। अब उनके परिवार के लोग अस्पताल में बारी-बारी से उनकी देखभाल कर रहे हैं।

नेपाल में हजारों लोग अब भी लापता

गुना माया का बचना उस समय सामने आया है जब नेपाल अब भी बड़ी मानवीय त्रासदी से जूझ रहा है। 26 अगस्त को आई फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। बाढ़ के साथ आए पानी, मिट्टी और मलबे ने बस्तियों और जरूरी बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल और आसपास के प्रभावित इलाकों में मृतकों की संख्या 1,200 से ऊपर पहुंच गई है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत एजेंसियां और सुरक्षा बल लगातार प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं।

सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी

बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगें भी बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। बड़ी संख्या में लोगों के इन सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। वहां तक पहुंचने के लिए सेना, भारी मशीनरी और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

कई इलाकों में सड़क और पुल टूट जाने के कारण राहत सामग्री पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है। कुछ जगहों पर अस्थायी रास्तों और वैकल्पिक साधनों से लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। प्रभावित परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे हैं।

तबाही के बीच उम्मीद बनी गुना माया की कहानी

नेपाल की इस त्रासदी में जहां लगातार मौत और तबाही की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं गुना माया का मलबे से जिंदा निकलना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर है। 97 साल की उम्र में इतने बड़े हादसे के बाद उनका बच जाना बचाव दल के लिए भी खास उपलब्धि माना जा रहा है।

अब परिवार की सबसे बड़ी चिंता उनकी सेहत है। अस्पताल में उनका इलाज जारी है और परिजन उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद कर रहे हैं।

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