एसडीएम थप्पड़ कांड से चर्चा में आए भगत सिंह सेना प्रमुख नरेश मीणा आज टोंक जिले के नगरफोर्ट पुलिस थाने में आत्मसमर्पण करेंगे। नरेश मीणा के सरेंडर से पहले पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
समर्थकों की बड़ी संख्या में थाने पहुंचने की संभावना को देखते हुए टोंक जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। जिला कलेक्टर टीना डाबी ने टोंक शहर, देवली और उनियारा क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी है।
भीड़ जुटने की आशंका के चलते प्रशासन का फैसला
प्रशासन को सोशल मीडिया के जरिए बड़ी संख्या में समर्थकों के नगरफोर्ट थाने पहुंचने की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस अधीक्षक की अनुशंसा पर जिला कलेक्टर ने यह आदेश जारी किया।
धारा 163 लागू होने के बाद बिना अनुमति 5 या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस, धरना-प्रदर्शन और सभा पर रोक रहेगी। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर हथियार लेकर चलने और प्रदर्शन करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल के लिए भी प्रशासन से अनुमति लेना जरूरी होगा। हालांकि, बारात, शवयात्रा, ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और कुछ निर्धारित श्रेणियों को इससे छूट दी गई है।
जमानत रद्द होने के बाद सरेंडर का आदेश
नरेश मीणा को न्यायालय ने जमानत रद्द होने के बाद 6 अगस्त तक आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद वह आज पुलिस थाने में सरेंडर करेंगे।
नरेश मीणा को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान समरावता गांव में हुई हिंसा मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया था।
क्या है एसडीएम थप्पड़ कांड?
यह मामला 13 नवंबर 2024 का है। देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान समरावता गांव के लोगों ने उनियारा उपखंड में शामिल करने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था।
उस समय निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे। आरोप है कि मतदान को लेकर हुए विवाद के दौरान उन्होंने उनियारा के तत्कालीन एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था।
इसके बाद 14 नवंबर को पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से गिरफ्तार किया था और कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया गया था।
करीब 8 महीने हिरासत में रहे थे नरेश मीणा
उच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2025 को नरेश मीणा को कुछ शर्तों के साथ जमानत दी थी। इनमें किसी भी धरना-प्रदर्शन में शामिल नहीं होना और स्वागत-सत्कार से दूर रहना शामिल था।
आरोप है कि उन्होंने इन शर्तों का उल्लंघन किया। झालावाड़ के पीपलोदी स्कूल हादसे के बाद हुए आंदोलन को लेकर दर्ज मामले के आधार पर नगरफोर्ट पुलिस ने न्यायालय में जमानत रद्द करने की याचिका दायर की थी।
न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए उनकी जमानत रद्द कर दी और सरेंडर के आदेश दिए।
करीब 60 लोगों पर दर्ज है मामला
इस पूरे मामले में नरेश मीणा समेत करीब 60 लोगों के खिलाफ केस दर्ज है। फिलहाल सभी आरोपी अलग-अलग मामलों में जमानत पर थे।
अब नरेश मीणा के सरेंडर को लेकर टोंक पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। प्रशासन की नजर समर्थकों की गतिविधियों और इलाके की कानून-व्यवस्था पर बनी हुई है।