आषाढ़ी पूर्णिमा पर जंतर-मंतर में होगा वायु परीक्षण, ध्वज पूजन के बाद बताया जाएगा बारिश का पारंपरिक अनुमान

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On Ashadhi Purnima, a traditional wind test will be conducted at Jaipur’s Jantar Mantar. Experts will study wind direction, speed and natural signs after flag worship to predict the monsoon rainfall pattern.

जयपुर के ऐतिहासिक जंतर-मंतर में आज यानी 29 जुलाई को आषाढ़ी वायु धारणी पूर्णिमा के अवसर पर पारंपरिक वायु परीक्षण किया जाएगा। ध्वज पूजन के बाद विशेषज्ञ वायु की दिशा, गति और अन्य प्राकृतिक संकेतों का अध्ययन करेंगे और इसके आधार पर जयपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में मानसून और बारिश को लेकर पारंपरिक पूर्वानुमान जारी किया जाएगा।

वायु की दिशा से लगाया जाएगा बारिश का अनुमान

इस आयोजन में वरिष्ठ विद्वान और ज्योतिषाचार्य शास्त्रों में बताए गए तरीकों के अनुसार वायु परीक्षण करेंगे। इसमें हवा की चाल, दिशा और प्राकृतिक संकेतों को देखकर आने वाले समय में बारिश की स्थिति का अनुमान लगाया जाएगा।

पिछले चार सालों से जंतर-मंतर पर होने वाले इस पारंपरिक पूर्वानुमान को लेकर लोगों और खासकर किसानों में काफी उत्सुकता रहती है।

धार्मिक परंपरा के साथ प्राकृतिक संकेतों का अध्ययन

आषाढ़ी वायु धारणी पूर्णिमा पर होने वाला यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं माना जाता, बल्कि इसे प्राचीन भारतीय खगोल और ज्योतिष परंपरा से जुड़ी प्राकृतिक संकेतों के अध्ययन की प्रक्रिया माना जाता है।

हालांकि आज आधुनिक मौसम विज्ञान में सैटेलाइट और वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल होता है, फिर भी जंतर-मंतर का यह पारंपरिक वायु परीक्षण लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

आज शाम ध्वज पूजन और वायु परीक्षण के बाद इस साल के मानसून को लेकर पारंपरिक अनुमान की घोषणा की जाएगी।

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