Home भारत 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस

18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस

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18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस
The Supreme Court has sought the Centre’s response on a plea seeking stronger safeguards for children under 18 on social media, including parental consent and verification measures.

नई दिल्ली: 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के सुरक्षित इस्तेमाल से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट में दायर याचिका में नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम बनाने और अकाउंट खोलने से पहले माता-पिता या कानूनी अभिभावक की अनुमति अनिवार्य करने की मांग की गई है।

यह याचिका ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस’ की ओर से दायर की गई है। याचिका में फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है।

13 साल की उम्र में अकाउंट बनाने की अनुमति पर सवाल

याचिका में कहा गया है कि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 13 साल की उम्र में बच्चों को अकाउंट बनाने की अनुमति देते हैं। वहीं, भारतीय कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को नाबालिग माना जाता है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की उम्र संबंधी नीतियों और भारतीय कानूनी व्यवस्था के बीच अंतर है। याचिका में मांग की गई है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की अनुमति देने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया तय की जाए।

माता-पिता की अनुमति और ई-केवाईसी की मांग

याचिका में केंद्र सरकार से सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में बदलाव करने या बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए अलग गाइडलाइंस बनाने की मांग की गई है।

प्रमुख मांगों में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति अनिवार्य करना शामिल है। इसके अलावा, बच्चों का अकाउंट बनाने से पहले माता-पिता या अभिभावक की पहचान की पुष्टि के लिए ई-केवाईसी को अनिवार्य करने का सुझाव भी दिया गया है।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म नाबालिगों के साथ किसी तरह का अनुबंध माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति के बिना न करें।

बच्चों पर सोशल मीडिया के मानसिक प्रभाव की चिंता

याचिका में बच्चों पर सोशल मीडिया और ज्यादा स्क्रीन टाइम के संभावित मानसिक प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं, एकाग्रता में कमी और अन्य परेशानियों का कारण बन सकता है।

याचिकाकर्ता ने बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उम्र के हिसाब से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई है।

बच्चों के सामने ऑनलाइन ये खतरे

याचिका में बच्चों के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कई तरह के संभावित खतरों का उल्लेख किया गया है। इनमें—

  • ऑनलाइन ग्रूमिंग और साइबर बुलिंग
  • यौन शोषण और तस्करी
  • निजी डेटा का गलत इस्तेमाल
  • उम्र के हिसाब से अनुचित कंटेंट तक पहुंच

जैसे खतरे शामिल हैं।

आईटी और कानून मंत्रालय को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कानून मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।

अब केंद्र सरकार को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, सोशल मीडिया पर उम्र की सीमा और माता-पिता की सहमति से जुड़े याचिका में उठाए गए मुद्दों पर अपना पक्ष रखना होगा। सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई में इस मामले को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं।

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