
मानसून के मौसम में बारिश और जलभराव के कारण कई तरह की संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। डेंगू, मलेरिया और पीलिया के साथ अब रैट फीवर यानी लेप्टोस्पायरोसिस के मामले भी चिंता बढ़ा रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, रैट फीवर शुरुआत में सामान्य वायरल बुखार जैसा लग सकता है, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे लिवर, किडनी और दिमाग तक को नुकसान पहुंचा सकती है।
रैट फीवर क्या है?
रैट फीवर एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जिसे मेडिकल भाषा में लेप्टोस्पायरोसिस कहा जाता है। यह बीमारी चूहे और अन्य संक्रमित जानवरों के पेशाब, मल या लार से दूषित पानी और मिट्टी के संपर्क में आने से फैल सकती है।
बारिश के दौरान जमा गंदे पानी और कीचड़ में यह बैक्टीरिया मौजूद रह सकता है। नंगे पैर चलने या शरीर पर लगे छोटे कट के जरिए यह संक्रमण शरीर में प्रवेश कर सकता है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
- खेतों में काम करने वाले किसान
- सफाई कर्मचारी
- नगर निगम कर्मचारी
- मछुआरे
- बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोग
रैट फीवर के लक्षण:
- तेज बुखार
- शरीर और मांसपेशियों में दर्द
- सिरदर्द
- ज्यादा थकान
- आंखों में लालिमा
- पीलिया
- किडनी और लिवर से जुड़ी परेशानी
डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग इसे सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो सकती है।
बचाव के लिए रखें ध्यान:
✅ बारिश में नंगे पैर चलने से बचें
✅ गंदे पानी के संपर्क से बचें
✅ पीने के पानी को उबालकर या फिल्टर करके पिएं
✅ घर और आसपास साफ-सफाई रखें
✅ बुखार होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, रैट फीवर का समय पर इलाज कराया जाए तो इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसलिए मानसून में हल्के बुखार को भी नजरअंदाज न करें।
