राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में अब नल से मिलने वाले पानी के लिए शुल्क लिया जा सकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में 13 अगस्त को जयपुर में हुई कैबिनेट बैठक के बाद जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने इसके संकेत दिए। मंत्री ने कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय है कि ग्रामीण परिवारों से कम से कम ₹50 प्रति माह शुल्क लिया जाना चाहिए। हालांकि, यह अभी अंतिम फैसला नहीं है।
₹50 फीस लेने का क्या है तर्क?
जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी के मुताबिक, पानी की सप्लाई के लिए मामूली शुल्क लेने से व्यवस्था की बेहतर निगरानी हो सकेगी। उन्होंने कहा कि कई जगह लोग खुद भी ₹50 शुल्क देने के पक्ष में हैं।
मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि जो व्यक्ति पानी की कमी के कारण एक महीने में करीब ₹2,000 का टैंकर मंगवाता है, उसके लिए ₹50 का शुल्क बड़ी रकम नहीं होगी। शुल्क लेने से पानी की चोरी और अवैध कनेक्शन पर भी निगरानी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पानी चोरी करने वालों पर FIR का प्रावधान
मंत्री ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति अवैध तरीके से पानी लेता है और समझाने के बाद भी ऐसा करना जारी रखता है, तो उसके खिलाफ FIR दर्ज करवाने का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सही मात्रा में और बेहतर गुणवत्ता का पानी उपलब्ध कराना है।
कैबिनेट ने संचालन एवं संधारण नीति को दी मंजूरी
कैबिनेट बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल की आपूर्ति को नियमित, स्वच्छ और टिकाऊ बनाए रखने के लिए संचालन एवं संधारण नीति को मंजूरी दी गई है।
इस नीति में केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन 2.0 के दिशा-निर्देशों और उसके 19 प्रमुख घटकों को शामिल किया गया है। इसके तहत ग्राम पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक 5-स्तरीय व्यवस्था तैयार की जाएगी।
लंबे समय तक बेहतर पानी सप्लाई पर जोर
नई व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं का लंबे समय तक सही संचालन करना है। सरकार का कहना है कि इससे जलापूर्ति व्यवस्था की मॉनिटरिंग मजबूत होगी और लोगों को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
फिलहाल ₹50 शुल्क का सुझाव मंत्री की व्यक्तिगत राय के तौर पर सामने आया है। अंतिम रूप से कितना शुल्क लिया जाएगा और किन क्षेत्रों में लागू होगा, इसका फैसला सरकार की आगे की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा।