डीडवाना/जयपुर: राजस्थान में गर्मी की छुट्टियां खत्म होते ही शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। डीडवाना जिले के 61 जर्जर स्कूल भवनों को गिराने के आदेश जारी किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि ये सभी भवन या तो पूरी तरह खतरनाक हालत में हैं या फिर उनकी संरचना कमजोर हो चुकी है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
क्यों लिया गया बुलडोजर एक्शन का फैसला?
जिला शिक्षा विभाग द्वारा मानसून से पहले सभी स्कूल भवनों का सर्वे कराया गया था। इस सर्वे में सामने आया कि कई स्कूल भवन बेहद जर्जर स्थिति में हैं।
अधिकारियों के अनुसार:
- 16 स्कूल भवन पूरी तरह असुरक्षित पाए गए
- 45 भवन आंशिक रूप से जर्जर घोषित किए गए
- सभी प्रभावित स्कूलों में कक्षाओं पर तत्काल रोक लगा दी गई है
इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को नजदीकी सुरक्षित स्कूलों में शिफ्ट कर दिया गया है ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) अजीत सिंह देथा के अनुसार, जिन भवनों की स्थिति बेहद खराब है, उन्हें मानसून से पहले गिराया जाएगा ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।
वहीं जिन स्कूलों में कुछ कमरे सुरक्षित हैं, वहां विशेष निगरानी में आंशिक रूप से उपयोग किया जाएगा।
मानसून से पहले सुरक्षा तैयारी
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि:
- भवनों की छतों की सफाई कराई जाए
- जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त की जाए
- कमजोर संरचनाओं की तुरंत पहचान की जाए
- असुरक्षित कमरों को बैरिकेडिंग कर बंद किया जाए
इसके साथ ही अधिकारियों को नियमित रूप से स्कूलों का फील्ड निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्यों जरूरी हुआ यह कदम?
शिक्षा विभाग का यह कदम भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोकने के लिए उठाया गया है। इससे पहले झालावाड़ में एक स्कूल भवन की छत गिरने से बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें कई बच्चों की जान चली गई थी और दर्जनों घायल हुए थे।
बच्चों की पढ़ाई पर असर नहीं
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर कुछ स्कूलों को दो शिफ्ट में चलाने की योजना भी तैयार की गई है।
निष्कर्ष
राजस्थान सरकार का यह फैसला भले ही सख्त माना जा रहा हो, लेकिन इसका उद्देश्य साफ है—बच्चों की सुरक्षा। आने वाले दिनों में जर्जर स्कूल भवनों को हटाकर सुरक्षित और मजबूत ढांचा तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।