Home आज की ख़ास ख़बर बिना मोटापे और डायबिटीज के भी हो सकता है फैटी लिवर! डॉक्टर ने बताए चौंकाने वाले कारण, कहीं आप भी तो नहीं हैं खतरे में?

बिना मोटापे और डायबिटीज के भी हो सकता है फैटी लिवर! डॉक्टर ने बताए चौंकाने वाले कारण, कहीं आप भी तो नहीं हैं खतरे में?

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बिना मोटापे और डायबिटीज के भी हो सकता है फैटी लिवर! डॉक्टर ने बताए चौंकाने वाले कारण, कहीं आप भी तो नहीं हैं खतरे में?
सामान्य वजन और बिना डायबिटीज वाले लोगों में भी बढ़ रहा है फैटी लिवर का खतरा, डॉक्टरों ने बताए इसके प्रमुख कारण।

न तो मोटापा, न डायबिटीज… फिर भी क्यों हो रही है फैटी लिवर की बीमारी? डॉक्टर ने बताया असली कारण

आज के समय में फैटी लिवर (Fatty Liver) केवल मोटापे या डायबिटीज से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई है। अब बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं जिनका वजन पूरी तरह सामान्य है, जो नियमित जीवनशैली अपनाते हैं और शराब का सेवन भी नहीं करते।

मुंबई के सैफी हॉस्पिटल के हेपेटोलॉजी और लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. चेतन कलाल के अनुसार, यह स्थिति अब तेजी से बढ़ रही है और इसे मेडिकल भाषा में Lean MASLD (पहले Lean NAFLD) कहा जाता है।

हेल्थ चेकअप में हुआ बड़ा खुलासा

डॉ. कलाल ने 34 वर्षीय रवि का उदाहरण साझा किया। रवि का वजन 68 किलोग्राम था, उन्हें न डायबिटीज थी और न ही हाई ब्लड प्रेशर। लेकिन कंपनी के नियमित हेल्थ चेकअप के दौरान अल्ट्रासाउंड में उनके लिवर में ग्रेड-1 फैटी लिवर पाया गया।

रिपोर्ट देखकर वह खुद भी हैरान रह गए, क्योंकि उन्हें कभी लगा ही नहीं था कि सामान्य वजन वाले व्यक्ति को भी यह बीमारी हो सकती है।


क्या है Lean Fatty Liver?

पहले फैटी लिवर को सिर्फ मोटे लोगों या अधिक शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब मेडिकल साइंस ने इस सोच को बदल दिया है।

आज इस बीमारी को Metabolic Dysfunction-Associated Steatotic Liver Disease (MASLD) कहा जाता है। इसका मतलब है कि यह बीमारी केवल वजन से नहीं बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म और अंदरूनी बदलावों से जुड़ी होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एशिया में फैटी लिवर के करीब 10 से 20 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जिनका वजन सामान्य होता है।


सामान्य वजन होने के बावजूद फैटी लिवर क्यों होता है?

1. जेनेटिक कारण

कुछ लोगों के जीन ऐसे होते हैं जिनकी वजह से लिवर में फैट तेजी से जमा होने लगता है। खासतौर पर PNPLA3 जीन वाले लोगों में यह खतरा अधिक देखा गया है।


2. शरीर के अंदर छिपा फैट (Visceral Fat)

कई लोग बाहर से बिल्कुल फिट दिखाई देते हैं, लेकिन उनके पेट के अंदरूनी अंगों के आसपास फैट जमा होता रहता है। यही फैट धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाने लगता है।


3. इंसुलिन रेजिस्टेंस

भले ही किसी व्यक्ति को डायबिटीज न हो, लेकिन यदि शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है तो लिवर में फैट जमा होने लगता है।


4. गलत खान-पान

बार-बार मैदा, सफेद चावल, पैकेज्ड स्नैक्स, बिस्कुट, मिठाइयां, कोल्ड ड्रिंक्स और मीठे जूस का सेवन लिवर में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ाकर फैटी लिवर का कारण बन सकता है।


5. आंतों की खराब सेहत (Gut Health)

नई रिसर्च बताती है कि खराब गट माइक्रोबायोम भी लिवर में सूजन और फैट जमा होने का बड़ा कारण बन सकता है। लगातार प्रोसेस्ड फूड, एंटीबायोटिक का अधिक उपयोग, तनाव और कम नींद इसका जोखिम बढ़ाते हैं।


6. हार्मोनल समस्याएं

हाइपोथायरायडिज्म, PCOS और शुरुआती इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याएं भी सामान्य वजन वाले लोगों में फैटी लिवर का खतरा बढ़ा सकती हैं।


अगर इलाज नहीं कराया तो क्या हो सकता है?

डॉक्टरों के मुताबिक, यदि समय रहते इलाज नहीं कराया गया तो फैटी लिवर धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकता है।

इससे होने वाली समस्याएं:

  • लिवर फाइब्रोसिस (Liver Scarring)
  • लिवर सिरोसिस
  • लिवर फेलियर
  • लिवर कैंसर

कैसे करें बचाव?

विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि हेल्थ चेकअप में फैटी लिवर का पता चलता है तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें।

बचाव के लिए:

  • संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
  • रोजाना कम से कम 30-45 मिनट व्यायाम करें।
  • मीठे पेय और प्रोसेस्ड फूड से दूरी रखें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • नियमित रूप से लिवर की जांच और जरूरत पड़ने पर फाइब्रोस्कैन करवाएं।
  • किसी भी लक्षण या रिपोर्ट आने पर गैस्ट्रो या लिवर विशेषज्ञ से सलाह लें।

डॉक्टर की अहम सलाह

डॉ. चेतन कलाल का कहना है कि वजन सामान्य होना इस बात की गारंटी नहीं है कि आपका लिवर पूरी तरह स्वस्थ है। यदि अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर दिखाई देता है, तो उसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच, सही खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है।

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