मानसून अपने साथ ठंडक और राहत तो लाता है, लेकिन दूषित पानी, गंदगी और वायरल संक्रमण का खतरा भी बढ़ा देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E जैसे संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं, जो आगे चलकर पीलिया (जॉन्डिस) का कारण बनते हैं। ऐसे में लिवर को सुरक्षित रखना और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
सिर्फ साफ और सुरक्षित पानी पिएं
मानसून में हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं। बाहर मिलने वाले जूस, बर्फ या खुले पेय पदार्थों से बचें, क्योंकि दूषित पानी संक्रमण का सबसे बड़ा कारण बन सकता है।
खाने-पीने में बरतें सावधानी
हमेशा ताजा और गर्म भोजन करें। बासी खाना, अधपका भोजन और सड़क किनारे मिलने वाले कटे फल, सलाद, चाट या पानी-पूरी जैसी चीजों से बचें। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें।
हाथों और आसपास की सफाई रखें
खाना खाने से पहले और टॉयलेट के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत डालें। टूथब्रश, रेजर जैसी निजी चीजें किसी के साथ साझा न करें और घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें।
पीलिया के लक्षणों को न करें नजरअंदाज
यदि लगातार बुखार, भूख कम लगना, उल्टी, गहरे रंग का पेशाब, आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, पेट दर्द, अत्यधिक थकान या वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉक्टर की सलाह जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में थोड़ी-सी सावधानी भी पीलिया जैसी गंभीर बीमारी से बचा सकती है। किसी भी लक्षण को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।