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ईरान ने गल्फ देशों को दी चेतावनी: अमेरिका ने हमला किया तो तेल ठिकानों, रिफाइनरी और पावर ग्रिड को बनाएंगे निशाना

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ईरान ने गल्फ देशों को दी चेतावनी: अमेरिका ने हमला किया तो तेल ठिकानों, रिफाइनरी और पावर ग्रिड को बनाएंगे निशाना
Iran warns Gulf nations that any new US attack could lead to strikes on regional energy facilities, including oil sites, refineries and power infrastructure.

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान ने गल्फ देशों को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके ऊर्जा ढांचे पर दोबारा हमला किया, तो वह पूरे क्षेत्र के अहम ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना सकता है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब, कतर, तुर्किये और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं से बातचीत की। उन्होंने इन देशों से अपील की कि वे अमेरिका पर दबाव बनाएं, ताकि किसी नए सैन्य हमले को रोका जा सके।

ईरान बोला- जवाब पहले से ज्यादा बड़ा होगा

ईरान का कहना है कि वह अभी भी बातचीत और कूटनीतिक समाधान के पक्ष में है, लेकिन अगर उस पर हमला किया गया तो जवाबी कार्रवाई पहले से ज्यादा बड़ी होगी।

ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि किसी भी नए हमले की स्थिति में सिर्फ अमेरिकी ठिकाने ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के तेल उत्पादन केंद्र, रिफाइनरी, बिजली नेटवर्क और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे भी निशाने पर आ सकते हैं।

सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रम्प से की बात

ईरान की चेतावनी के बाद सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बातचीत की। उन्होंने सैन्य कार्रवाई से बचने और बातचीत के रास्ते को जारी रखने की अपील की।

मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और सैन्य गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बन चुकी है।

अगर ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

तेल बाजार पर भी नजर

मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादन क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में अगर क्षेत्र के तेल ठिकानों या शिपिंग रूट पर हमला होता है, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है।

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