Iran America War Update: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात लगातार चौथे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी भी शुरू कर दी है।
अमेरिका का कहना है कि इन कार्रवाइयों का मकसद ईरान पर दबाव बढ़ाना और उसकी सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। वहीं, ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई जारी है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में हालात और गंभीर होते जा रहे हैं।
ट्रम्प की बड़ी चेतावनी- बिजलीघर और पुल होंगे निशाने पर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान के खिलाफ हमले जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होता है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई को और बढ़ा सकता है।
ट्रम्प ने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में ईरान के बिजलीघर और पुल भी निशाने पर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर जमीनी सैन्य अभियान पर भी विचार किया जा सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमला, भारतीय की मौत
इस बीच होर्मुज स्ट्रेट में तनाव का असर समुद्री व्यापार पर भी दिख रहा है। ईरानी सेना (IRGC) की ओर से व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है।
इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हुई है, जबकि 10 लोग घायल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जहाज पर कुल 20 भारतीय क्रू मेंबर मौजूद थे।
भारत ने ईरानी राजदूत को किया तलब
होर्मुज में भारतीय नागरिक की मौत और जहाजों पर हमले को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया है।
फारस की खाड़ी में फंसे भारत से जुड़े 11 जहाज
विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत से जुड़े 11 जहाज और करीब 148 भारतीय नाविक अभी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। ये जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने का इंतजार कर रहे हैं।
होर्मुज में शिपिंग ट्रैफिक बेहद कम
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही भी काफी प्रभावित हुई है। मंगलवार को यहां से सिर्फ 4 जहाज गुजरे। यह 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद सबसे कम शिपिंग ट्रैफिक बताया जा रहा है।
20% टैक्स लगाने का फैसला वापस
अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत टैक्स लगाने का फैसला वापस ले लिया है। ट्रम्प ने मिडिल ईस्ट के नेताओं से बातचीत के बाद यह निर्णय लिया।
अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर है। अगर सैन्य कार्रवाई और बढ़ती है तो इसका असर तेल सप्लाई, वैश्विक बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।