इंटरनेशनल डेस्क: ईरान ने घोषणा की है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत जारी होने वाली 6 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों का उपयोग देश की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। इस मुद्दे पर कतर की राजधानी दोहा में हुई बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। वहीं ईरान ने अमेरिका पर समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं करने का आरोप भी लगाया है।
जरूरी सामान खरीदने में होगा फंड का इस्तेमाल
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि दोहा में कतर के अधिकारियों के साथ हुई बातचीत में यह सहमति बनी कि फ्रीज फंड का इस्तेमाल दवाइयों, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जाएगा। उनका कहना है कि यह राशि केवल मानवीय जरूरतों के लिए खर्च की जाएगी।
समझौते की निगरानी के लिए बनेगी कमेटी
बैठक में यह भी तय किया गया कि समझौते के पालन पर नजर रखने के लिए एक निगरानी समिति गठित की जाएगी। यदि किसी पक्ष की ओर से समझौते का उल्लंघन होता है तो उसकी आधिकारिक शिकायत इसी समिति के माध्यम से दर्ज की जाएगी।
अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप
ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने समझौते की कुछ महत्वपूर्ण शर्तों का पालन नहीं किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्रीय संघर्षों और अन्य मुद्दों पर तय प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह लागू नहीं किया गया।
हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया कि दोहा में अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ उसकी कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई। दोनों पक्षों के बीच संवाद मध्यस्थ देशों के माध्यम से अलग-अलग हुआ।
पिछले 24 घंटे के प्रमुख घटनाक्रम
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
- इजराइल ने स्पष्ट किया कि लेबनान, सीरिया और गाजा में उसकी सैन्य मौजूदगी फिलहाल जारी रहेगी।
- ईरान ने शीर्ष नेतृत्व से जुड़े कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का दावा किया है।
- होर्मुज स्ट्रेट से तेल और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होती दिखाई दे रही है।
- समझौते के कई अहम मुद्दों पर अब भी दोनों देशों के बीच अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।
कई मुद्दों पर अब भी बना गतिरोध
हालांकि समझौते पर हस्ताक्षर हुए कुछ समय बीत चुका है, लेकिन फ्रीज फंड जारी करने, तेल निर्यात में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे कई संवेदनशील विषयों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली वार्ताएं इस समझौते की दिशा तय करेंगी।