
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में लगातार बारिश के बाद इंद्रावती नदी का जलस्तर ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। नदी का पानी 12.39 मीटर दर्ज किया गया, जो पिछले 53 साल का सबसे बड़ा स्तर है। इससे पहले 9 जुलाई 1973 को नदी का जलस्तर 12.18 मीटर रिकॉर्ड हुआ था। इस बार पुराना रिकॉर्ड 21 सेंटीमीटर से टूट गया।
जगदलपुर के कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया है। प्रभावित क्षेत्रों की ड्रोन तस्वीरों में बड़ी मात्रा में पानी जमा नजर आ रहा है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया।
नाव और हेलिकॉप्टर से लोगों को निकाला
बाढ़ की स्थिति बिगड़ने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। सोमवार को 833 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रभावित लोगों के लिए जिले में 65 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां करीब 8,894 लोग रह रहे हैं।
प्रशासन की ओर से लगातार जलस्तर और बाढ़ प्रभावित इलाकों की निगरानी की जा रही है।
राजस्थान में बारिश के साथ गिरे ओले
उधर, राजस्थान में भी मौसम ने करवट ली है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से जयपुर, बीकानेर और चूरू समेत कुछ इलाकों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई।
मौसम में बदलाव के बाद रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। शेखावाटी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 2 से 3 दिनों में तापमान में करीब 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है।
सितंबर में यूपी में जनवरी जैसा कोहरा
उत्तर प्रदेश में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम का अलग रूप देखने को मिला। मंगलवार सुबह अमेठी, रामपुर और बदायूं में घना कोहरा और धुंध छाई रही। कई जगह विजिबिलिटी इतनी कम रही कि करीब 25 मीटर की दूरी तक देखना मुश्किल हो गया।
धुंध के कारण लोगों को सुबह हल्की ठंड महसूस हुई। इसी बीच प्रदेश से मानसून की वापसी भी शुरू हो चुकी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और अलीगढ़ समेत कुछ इलाकों से मानसून लौट चुका है। इसके चलते प्रदेश में भारी बारिश का दौर फिलहाल थमता नजर आ रहा है।
