Home आज की ख़ास ख़बर दौसा: ‘चायवालाज’ स्टार्टअप के फाउंडर रोहित शर्मा ने दी जान, 17 साल की उम्र में शुरू किया था बिजनेस

दौसा: ‘चायवालाज’ स्टार्टअप के फाउंडर रोहित शर्मा ने दी जान, 17 साल की उम्र में शुरू किया था बिजनेस

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दौसा: ‘चायवालाज’ स्टार्टअप के फाउंडर रोहित शर्मा ने दी जान, 17 साल की उम्र में शुरू किया था बिजनेस
Rohit Sharma, the young founder of Chaiwalaz startup, died at his residence in Dausa. Known for building a successful tea cafe brand and receiving the National MSME Award 2022, his sudden demise has shocked the startup community.

राजस्थान के दौसा जिले से एक युवा उद्यमी की मौत की दुखद खबर सामने आई है। चर्चित ‘चायवालाज’ स्टार्टअप के फाउंडर रोहित शर्मा (30) ने शनिवार दोपहर अपने साकेत कॉलोनी स्थित घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद परिवार और स्टार्टअप जगत में शोक की लहर फैल गई है।

घटना दौसा शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। परिजनों को जब रोहित के कमरे से कोई हलचल नहीं मिली तो उन्होंने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। अनहोनी की आशंका में दरवाजा तोड़ा गया, जहां रोहित फंदे से लटके मिले। परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पुलिस के अनुसार, मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है और मामले की जांच जारी है।

17 साल की उम्र में शुरू किया था ‘चायवालाज’

रोहित शर्मा कम उम्र से ही बिजनेस और इनोवेशन को लेकर चर्चा में रहे थे। उन्होंने महज 17 साल की उम्र में नर्सिंग की पढ़ाई के दौरान अपना स्टार्टअप शुरू किया था। जयपुर के मानसरोवर स्थित शिप्रा पथ से उन्होंने ‘चायवालाज’ नाम से पहला कैफे शुरू किया था।

उनका चाय कैफे कॉन्सेप्ट युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ और धीरे-धीरे उन्होंने जयपुर समेत अलग-अलग जगहों पर 7 आउटलेट्स खड़े कर दिए। बिजनेस के साथ-साथ रोहित समाजसेवा से भी जुड़े रहे और दौसा में ‘मिशन हेल्पलाइन’ के जरिए लोगों की मदद करते थे।

नेशनल MSME अवॉर्ड से हुए थे सम्मानित

रोहित शर्मा के स्टार्टअप मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली थी। साल 2022 में उन्हें नेशनल MSME अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें कई संस्थाओं की ओर से युवा उद्यमी के रूप में सम्मान मिल चुका था।

बिजनेस छोड़कर चुनी थी अध्यात्म की राह

सफल बिजनेस के बावजूद पिछले कुछ समय से रोहित के जीवन में बड़ा बदलाव आया था। करीब छह महीने पहले उन्होंने ‘चायवालाज’ के सभी आउटलेट बंद कर दिए थे और अध्यात्म की राह अपना ली थी।

वे धार्मिक यात्राओं से जुड़े रहने लगे थे और लेखन में भी रुचि लेने लगे थे। उनकी लिखी किताब ‘तत्सुखे सुखित्वं’ को भी लोगों ने पसंद किया। सोशल मीडिया पर उन्होंने अपना नाम बदलकर ‘रोहित शिवोहम’ कर लिया था।

राजनीति में भी रखा था कदम

रोहित शर्मा ने साल 2024 में दौसा विधानसभा उपचुनाव के दौरान निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर राजनीति में कदम रखने की कोशिश की थी। हालांकि बाद में उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया था।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

रोहित के पिता हितेंद्र मोहन शर्मा दौसा में मेडिकल स्टोर चलाते हैं। उनकी पत्नी एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं और उनका एक 7 साल का बेटा भी है। रोहित की अचानक मौत से परिवार गहरे सदमे में है।

पुलिस मामले की जांच कर रही है और आत्महत्या के पीछे की वजहों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

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