लंग कैंसर दुनिया में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले कैंसरों में शामिल है और इससे होने वाली मौतों की संख्या भी काफी ज्यादा है। बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई मामलों में इसका पता शुरुआती चरण में नहीं चल पाता। ऐसे में एक नई रिसर्च ने लंग कैंसर के जोखिम की पहले पहचान की दिशा में उम्मीद जगाई है।
हाल ही में जर्नल ‘Cell’ में प्रकाशित रिसर्च में वैज्ञानिकों ने ब्लड में मौजूद 14 खास प्रोटीन की पहचान की है। रिसर्च के मुताबिक, इन प्रोटीन के स्तर को देखकर किसी व्यक्ति में लंग कैंसर विकसित होने के जोखिम का अनुमान डायग्नोसिस से करीब 5 साल पहले लगाया जा सकता है।
कैसे काम करेगा ब्लड टेस्ट?
हमारे शरीर में कैंसर विकसित होने पर कई जैविक बदलाव होते हैं। इन बदलावों का असर ब्लड में मौजूद अलग-अलग प्रोटीन के स्तर पर भी दिखाई दे सकता है।
वैज्ञानिकों ने ऐसे ही प्रोटीन के पैटर्न का अध्ययन किया। रिसर्च में सामने आया कि 14 प्रोटीन का एक खास संयोजन भविष्य में लंग कैंसर के जोखिम से जुड़ा हो सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि केवल इन प्रोटीन की जांच से किसी व्यक्ति में कैंसर की पक्की पुष्टि हो जाएगी। यह फिलहाल जोखिम का अनुमान लगाने वाली रिसर्च है, नियमित कैंसर डायग्नोसिस टेस्ट नहीं।
5 साल पहले रिस्क पता चलने से क्या फायदा?
लंग कैंसर का शुरुआती चरण में पता चलना इलाज के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर भविष्य में यह ब्लड टेस्ट वैज्ञानिक जांच और क्लिनिकल इस्तेमाल के लिए सफल साबित होता है, तो डॉक्टरों को हाई-रिस्क लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
ऐसे लोगों की आगे स्क्रीनिंग और जरूरी जांच ज्यादा करीब से की जा सकती है। इससे बीमारी का पता अधिक शुरुआती चरण में चलने की संभावना बढ़ सकती है।
किन लोगों को ज्यादा फायदा हो सकता है?
लंग कैंसर का खतरा हर व्यक्ति में समान नहीं होता। धूम्रपान इसका सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है। इसके अलावा लंबे समय तक सेकेंड हैंड स्मोक, वायु प्रदूषण और कुछ व्यावसायिक या पर्यावरणीय जोखिम भी भूमिका निभा सकते हैं।
अगर भविष्य में यह टेस्ट मान्य और उपलब्ध होता है, तो हाई-रिस्क लोगों की पहचान में इसका इस्तेमाल उपयोगी हो सकता है।
लंग कैंसर के शुरुआती संकेत क्या हैं?
लंग कैंसर के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। संभावित संकेतों में शामिल हैं:
- लंबे समय तक रहने वाली खांसी
- खांसी के साथ खून आना
- सांस लेने में परेशानी
- सीने में दर्द
- बार-बार फेफड़ों में संक्रमण होना
- बिना वजह वजन कम होना
- लगातार थकान महसूस होना
इनमें से कोई लक्षण होने का मतलब जरूरी नहीं कि कैंसर ही हो, लेकिन लगातार बने रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
लंग कैंसर का खतरा कैसे कम करें?
धूम्रपान छोड़ना लंग कैंसर के खतरे को कम करने के सबसे महत्वपूर्ण तरीकों में से एक है। इसके अलावा सेकेंड हैंड स्मोक से बचना, प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क को कम करना और काम की जगह पर हानिकारक रसायनों या धूल से बचाव के लिए सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना जरूरी है।
जिन लोगों में लंग कैंसर का जोखिम ज्यादा है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार उचित स्क्रीनिंग के बारे में जानकारी लेनी चाहिए।
अभी इस रिसर्च की स्थिति क्या है?
14 प्रोटीन की पहचान एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज है, लेकिन इसे आम लोगों के लिए रूटीन ब्लड टेस्ट मानना अभी जल्दबाजी होगी। इस तकनीक की सटीकता और उपयोगिता को बड़े और अलग-अलग आबादी वाले अध्ययनों में जांचना जरूरी होगा।
अगर आगे की रिसर्च में इसके नतीजे मजबूत साबित होते हैं, तो भविष्य में ब्लड टेस्ट के जरिए लंग कैंसर के जोखिम की पहले पहचान करने और हाई-रिस्क लोगों की समय रहते निगरानी में मदद मिल सकती है।