राजस्थान के दूदू जिले में स्थित दादू दयाल जी की तपोस्थली भैराणा धाम को लेकर चल रहा विवाद अब बड़ा राजनीतिक संग्राम बन चुका है। रीको औद्योगिक परियोजना के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन उस वक्त गरमा गया, जब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने मंच से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मंत्रियों पर तीखी टिप्पणी कर दी। बेनीवाल के बयान के बाद भाजपा पूरी तरह हमलावर नजर आ रही है और राज्य की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।
बेनीवाल के बयान से मचा बवाल
भैराणा धाम बचाओ आंदोलन के दौरान हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार के मंत्रियों पर भी निशाना साधा। बयान सामने आते ही भाजपा नेताओं ने इसे मर्यादा के खिलाफ बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।
भाजपा ने खोला मोर्चा
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने बेनीवाल की भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीति में इस तरह की शब्दावली लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए उग्र और विवादित बयान दे रहे हैं।
राठौड़ ने कहा कि जनता ऐसे नेताओं को समय आने पर जवाब देगी और राजनीति में शालीनता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि अमर्यादित भाषा बोलने वाले नेताओं को बढ़ावा न दिया जाए।
भाजपा प्रवक्ता का पलटवार
राजस्थान भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने भी बेनीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता सब समझती है और किसी को खुद को सबसे ताकतवर समझने की गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए। उन्होंने आरएलपी के राजनीतिक भविष्य पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी बयानबाजी से पार्टी को नुकसान होगा।
क्या है पूरा भैराणा धाम विवाद?
दरअसल, भैराणा धाम के पास प्रस्तावित रीको औद्योगिक क्षेत्र को लेकर संत समाज और स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि औद्योगिक परियोजना से धार्मिक स्थल और आसपास का पर्यावरण प्रभावित होगा।
कई दिनों से संत धरना और अग्नितप कर रहे थे। इसी आंदोलन को समर्थन देने के लिए हनुमान बेनीवाल अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और जयपुर कूच का ऐलान कर दिया।
जयपुर कूच से पहले बढ़ा तनाव
बुधवार को भारी संख्या में समर्थक भैराणा धाम से जयपुर की ओर बढ़ने लगे। इस दौरान पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स भी हटाए गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और देर रात तक बातचीत चली।
रात 1:30 बजे बनी सहमति
कई दौर की बातचीत के बाद प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच समझौता हुआ। प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया कि विवादित 800 बीघा जमीन पर चल रहे औद्योगिक कार्य को फिलहाल रोक दिया जाएगा। साथ ही पूरे मामले की समीक्षा के लिए विशेष समिति बनाने की बात भी कही गई।
इसके बाद हनुमान बेनीवाल ने जयपुर कूच वापस लेने का ऐलान किया और इसे आंदोलन की जीत बताया। हालांकि संतों का धरना अभी भी जारी है और पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही।