मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। दोनों देशों ने युद्ध और टकराव को रोकने के उद्देश्य से एक अंतरिम समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति जताई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर किए जाने के बाद यह समझौता प्रभावी हो गया।
इस समझौते को लेकर दावा किया जा रहा है कि आने वाले 60 दिनों में दोनों देश एक स्थायी और व्यापक समझौते की दिशा में काम करेंगे। समझौते के कई बिंदु ऐसे हैं जो वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और परमाणु कार्यक्रमों पर दूरगामी असर डाल सकते हैं।
समझौते की सबसे बड़ी बातें
1. युद्ध और सैन्य कार्रवाई पर विराम
अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी गुटों के बीच चल रहे सभी सैन्य संघर्षों को रोकने पर सहमति बनी है। इसमें क्षेत्रीय तनाव वाले कई मोर्चे भी शामिल हैं।
2. संप्रभुता का सम्मान
दोनों देश एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे और राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करेंगे।
3. 60 दिनों में स्थायी समझौते का लक्ष्य
यह MoU केवल शुरुआती कदम माना जा रहा है। अगले 60 दिनों में अंतिम समझौते का मसौदा तैयार करने की कोशिश होगी।
4. आर्थिक गतिविधियों को राहत
समुद्री व्यापार और बंदरगाहों से जुड़े कई प्रतिबंधों में ढील मिलने से ईरान को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
5. होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा
दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सामान्य जहाजरानी के लिए खोला जाएगा। शुरुआती 60 दिनों तक किसी अतिरिक्त शुल्क की बात नहीं होगी।
6. पुनर्निर्माण के लिए विशाल आर्थिक पैकेज
ईरान के आर्थिक विकास और पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर तक की संभावित फंडिंग व्यवस्था पर सहमति बनी है।
7. प्रतिबंधों में राहत का रास्ता
भविष्य के व्यापक समझौते के बाद ईरान पर लगाए गए कई आर्थिक प्रतिबंध चरणबद्ध तरीके से हटाए जा सकते हैं।
8. परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा
ईरान ने दोहराया है कि उसका उद्देश्य परमाणु हथियार विकसित करना नहीं है।
9. मौजूदा हालात में बड़ा बदलाव नहीं
अंतिम समझौते तक दोनों पक्ष वर्तमान स्थिति को और नहीं बिगाड़ेंगे।
10. तेल निर्यात को राहत
ईरान के तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आसानी लाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
11. फ्रीज की गई संपत्तियों तक पहुंच
ईरान की विदेशों में अटकी संपत्तियों और फंड तक पहुंच बहाल करने पर चर्चा होगी।
12. संयुक्त निगरानी तंत्र
समझौते के पालन की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था बनाई जाएगी।
13. चरणबद्ध बातचीत
सभी मुद्दों पर एक साथ फैसला नहीं होगा। संवेदनशील विषयों पर अलग-अलग दौर में चर्चा की जाएगी।
14. संयुक्त राष्ट्र की भूमिका
अंतिम समझौते को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाया जा सकता है।
दुनिया की नजर अगले 60 दिनों पर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल शुरुआत है। असली चुनौती परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों की समाप्ति, तेल व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर अंतिम सहमति बनाने की होगी।
अगर बातचीत सफल रहती है तो यह समझौता पिछले कई दशकों में अमेरिका और ईरान के रिश्तों में सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। वहीं यदि वार्ता बीच में अटकती है, तो क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।