जम्मू-कश्मीर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला बाबा बर्फानी का हिमलिंग इस बार तेज गर्मी के कारण तेजी से पिघल गया है। ताजा तस्वीरों में हिमलिंग की ऊंचाई घटकर लगभग 1 फीट रह गई है। मई में इसकी ऊंचाई करीब 7 फीट थी, जबकि पहली पूजा के समय भी यह 5 फीट से अधिक था। अब यह लगभग 90 प्रतिशत तक पिघल चुका है।
हालांकि हिमलिंग के आकार में आई इस बड़ी कमी के बावजूद अमरनाथ यात्रा पूरी तरह जारी है और श्रद्धालु लगातार बाबा बर्फानी के दर्शन कर रहे हैं।
3 दिन में 56 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
3 जुलाई से शुरू हुई 57 दिनों की अमरनाथ यात्रा में पहले तीन दिनों के भीतर 56 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में करीब 18.6 प्रतिशत अधिक है। पिछले साल शुरुआती तीन दिनों में लगभग 47,972 श्रद्धालु यात्रा पर पहुंचे थे।
इस वर्ष भी श्रद्धालु दोनों प्रमुख मार्गों—नुनवान-पहलगाम और बालटाल—से लगातार बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
क्यों पिघल गया हिमलिंग?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार मौसम अपेक्षाकृत गर्म रहने और तापमान लगातार बढ़ने के कारण गुफा के भीतर बना प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग तेजी से पिघल गया। प्राकृतिक हिमलिंग पूरी तरह मौसम पर निर्भर करता है, इसलिए तापमान में बदलाव का सीधा असर इसके आकार पर पड़ता है।
क्या फिर से बन सकता है हिमलिंग?
यदि आने वाले दिनों में भारी बर्फबारी हो या तापमान शून्य से नीचे चला जाए, तो हिमलिंग दोबारा बनने की संभावना हो सकती है। हालांकि मौजूदा मौसम को देखते हुए इसकी संभावना काफी कम मानी जा रही है।
कैसे बनता है प्राकृतिक हिमलिंग?
अमरनाथ गुफा की छत से टपकने वाली पानी की बूंदें सर्दियों और वसंत ऋतु में जमकर धीरे-धीरे बर्फ का विशाल शिवलिंग बनाती हैं। यही प्राकृतिक हिमलिंग हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है।
क्या यात्रा पर पड़ेगा असर?
फिलहाल प्रशासन की ओर से यात्रा रोकने या किसी प्रकार का बदलाव करने की कोई घोषणा नहीं की गई है। श्रद्धालु पहले की तरह दर्शन कर रहे हैं और यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है।
दो मार्गों से हो रही यात्रा
अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से संचालित की जाती है—
- नुनवान-पहलगाम मार्ग – लगभग 48 किलोमीटर, अपेक्षाकृत आसान।
- बालटाल मार्ग – लगभग 14 किलोमीटर, छोटा लेकिन अधिक कठिन चढ़ाई वाला।
इस वर्ष यात्रा 28 अगस्त (रक्षाबंधन) तक चलेगी। प्रशासन के अनुसार करीब 4 लाख श्रद्धालुओं ने यात्रा के लिए पहले ही पंजीकरण कराया है।