अजमेर सेंट्रल जेल में चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सामने आया है कि जिस हाई सिक्योरिटी जेल में जगन गुर्जर की हत्या हुई, वहां लगे कई CCTV कैमरे लंबे समय से खराब थे। जेल प्रशासन ने कैमरे, UPS और मॉनिटर में खराबी को लेकर संबंधित विभाग को कई बार जानकारी दी थी, लेकिन समय रहते इन्हें ठीक नहीं कराया गया।
29 जून को हुई थी जगन गुर्जर की हत्या
29 जून को अजमेर सेंट्रल जेल में बंद जगन गुर्जर की दूसरे कैदी विष्णु ने हत्या कर दी थी। पुलिस पूछताछ में विष्णु ने बताया कि उसने तौलिए की मदद से वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद घटना को आत्महत्या जैसा दिखाने की कोशिश की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि वारदात से पहले सेल के पास लगे CCTV कैमरे पर टूथपेस्ट लगाया गया था, ताकि कैमरे में गतिविधियां साफ नजर न आएं।
16 मई को अजमेर जेल लाया गया था जगन
जगन गुर्जर को 16 मई को अजमेर जेल में रखा गया था। इससे पहले वह अपने भाई पप्पू गुर्जर के साथ दूसरी जेल में बंद था। भाई के साथ मनमुटाव के बाद जगन ने जेल बदलने की मांग की थी।
अजमेर जेल में विष्णु, पंकज और जगन अलग-अलग सेल में बंद थे। शुरुआत में तीनों के बीच सामान्य संबंध बताए गए। वे साथ में लूडो भी खेलते थे और 27 जून को भी तीनों ने साथ समय बिताया था।
पुलिस पूछताछ में विष्णु ने जगन पर उसे अपराध को लेकर ताने मारने का आरोप लगाया। इन्हीं बातों से नाराज होकर उसने हत्या की योजना बनाने की बात कही।
319 में से 81 CCTV कैमरे ठीक नहीं
जगन की हत्या के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था की जांच में बड़ी खामी सामने आई। जेल प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक अजमेर जेल में कुल 319 CCTV कैमरे लगाए गए हैं।
इनमें से 61 कैमरे काम नहीं कर रहे थे, जबकि 20 कैमरे UPS और बिजली की समस्या के कारण बार-बार ऑफलाइन हो रहे थे। यानी कुल 81 कैमरे ठीक तरीके से काम नहीं कर रहे थे।
जिस सेल के पास घटना हुई, वहां लगा कैमरा भी तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गया था। ऐसे में जेल जैसे हाई सिक्योरिटी परिसर में निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जेल प्रशासन ने 10 बार दी थी जानकारी
रिपोर्ट के अनुसार जेल प्रशासन ने CCTV कैमरों, UPS और मॉनिटर में खराबी की जानकारी संबंधित DOIT विभाग को कई बार दी थी। 21 मार्च से 30 जून के बीच करीब 10 बार इस समस्या के बारे में विभाग को लिखा गया।
जगन गुर्जर की हत्या के अगले दिन 30 जून को भी जेल अधीक्षक ने खराब CCTV व्यवस्था को लेकर विभाग को पत्र भेजा था। इसके बावजूद समय रहते समस्या का समाधान नहीं होने की बात सामने आई है।
हाईकोर्ट ने भी उठाए सुरक्षा पर सवाल
मामले के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने जेलों में कैदियों की सुरक्षा और CCTV व्यवस्था को लेकर गंभीरता दिखाई। कोर्ट में पेश रिपोर्ट के बाद जेल के खराब कैमरों को जल्द ठीक कराने के निर्देश दिए गए।
अब बड़ा सवाल यही है कि जब जेल प्रशासन को कैमरों की खराबी की जानकारी पहले से थी, तो उन्हें समय रहते ठीक क्यों नहीं कराया गया? साथ ही यह भी जांच का विषय है कि जगन गुर्जर की हत्या वास्तव में आपसी विवाद का नतीजा थी या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी।