पटना | बिहार
बिहार की राजनीति में आज बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के 32 नए मंत्रियों ने शपथ ली। इस दौरान पूरा माहौल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और हाई-प्रोफाइल मौजूदगी से गूंज उठा।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी ने इस शपथ ग्रहण को और भी खास बना दिया।
नीतीश के बेटे समेत 32 मंत्रियों की एंट्री, सियासत में नया समीकरण
सबसे बड़ी चर्चा का केंद्र रहे नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार, जिन्हें इस नए मंत्रिमंडल में जगह मिली है। उनके साथ कई अनुभवी और नए चेहरों को भी शामिल किया गया है, जिससे एनडीए ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है।
इस कैबिनेट में बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी (रामविलास), HAM और आरएलएम—सभी सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
मंच पर दिखी गर्मजोशी, मोदी-नीतीश की मुलाकात ने खींचा ध्यान
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हाथ पकड़कर पास बुलाया। वहीं नीतीश कुमार ने भी प्रधानमंत्री के कंधे पर हाथ रखकर सौहार्दपूर्ण राजनीतिक संकेत दिया।
यह पल कार्यक्रम का सबसे चर्चित क्षण बन गया।
किन-किन नेताओं को मिली जगह?
नई कैबिनेट में कई पुराने और नए चेहरों को शामिल किया गया है—
- जेडीयू से: श्रवण कुमार, मदन सहनी, लेसी सिंह, रत्नेश सदा
- बीजेपी से: रामकृपाल यादव, नीतीश मिश्रा, दिलीप जायसवाल, विजय कुमार सिन्हा
- HAM से: डॉ. संतोष कुमार सुमन
- आरएलएम से: भगवान सिंह कुशवाहा
- अन्य प्रमुख चेहरे: श्रेयसी सिंह, मोहम्मद जमा खान, लखेंद्र कुमार रौशन
क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर फोकस
इस मंत्रिमंडल विस्तार में सरकार ने साफ तौर पर क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति अपनाई है। बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों से नेताओं को शामिल कर राजनीतिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश की गई है।
22 दिनों में बड़ा बदलाव, सत्ता में नई दिशा
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और इस्तीफे के बाद बने इस राजनीतिक बदलाव ने बिहार की सत्ता में नया अध्याय जोड़ दिया है। महज 22 दिनों में बने इस नए ढांचे को आने वाले समय में बेहद अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक हलचल तेज, आगे क्या होगा?
बिहार की इस नई एनडीए सरकार के गठन के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह कैबिनेट राज्य में विकास और स्थिरता को किस दिशा में ले जाएगी।