जयपुर: राजस्थान में मानसून ने अब रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। मौसम विभाग ने प्रदेश के 30 जिलों में तेज बारिश, आंधी और तेज हवाओं को लेकर ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। अगले कुछ दिनों में दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग ने जयपुर, अजमेर, ब्यावर, टोंक, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में मध्यम से तेज बारिश के साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। बूंदी के कुछ हिस्सों में भी मौसम बिगड़ने की संभावना जताई गई है।
20 से ज्यादा जिलों में येलो अलर्ट
अलवर, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर, कोटा, बारां, झालावाड़, सीकर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, नागौर, पाली, राजसमंद, उदयपुर, सलूम्बर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और डीडवाना-कुचामन समेत कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
इन इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
5 जुलाई तक बढ़ेगी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, 3 से 6 जुलाई के बीच पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में मानसून और सक्रिय होगा। इस दौरान कोटा, उदयपुर और आसपास के कई इलाकों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।
वहीं पश्चिमी राजस्थान में भी 3 से 4 जुलाई के दौरान आंधी और बारिश का दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है।
पश्चिमी राजस्थान में गर्मी अभी बरकरार
एक ओर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश से राहत मिल रही है, वहीं पश्चिमी राजस्थान में भीषण गर्मी का असर अभी भी बना हुआ है।
बुधवार को श्रीगंगानगर प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 44.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, जोधपुर और बीकानेर संभाग के कुछ हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। अधिक नमी के कारण इन इलाकों में उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।
लोगों के लिए सलाह
मौसम विभाग ने तेज आंधी और बारिश को देखते हुए लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े न होने तथा बिजली चमकने के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहने की अपील की है।
किसानों के लिए राहत
बारिश की बढ़ती गतिविधियों से खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही जलाशयों में पानी बढ़ने और पेयजल संकट में भी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।