डच डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी (DPA) ने Uber पर करीब 825 मिलियन यूरो यानी लगभग ₹8,100 करोड़ का भारी जुर्माना लगाया है। रेगुलेटर के मुताबिक, कंपनी ने 2018 से 2022 के बीच कुछ ड्राइवरों के अकाउंट को सस्पेंड या ब्लॉक करने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल किया, जिसमें पर्याप्त मानवीय समीक्षा नहीं थी।
क्या था मामला?
रेगुलेटर के अनुसार, Uber के सिस्टम में ड्राइवरों की रेटिंग और संभावित धोखाधड़ी जैसे संकेतों के आधार पर अकाउंट पर कार्रवाई की जाती थी। आरोप है कि कई मामलों में ड्राइवरों को यह पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई कि उनके खिलाफ फैसला किस तरह लिया गया और उन्हें प्रभावी तरीके से अपनी बात रखने का अवसर भी नहीं मिला।
शिकायत कहां से आई?
इस मामले की शिकायत फ्रांस में Uber के ड्राइवरों की ओर से की गई थी। Uber का यूरोपीय मुख्यालय नीदरलैंड्स में होने के कारण मामले की जांच डच डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने की।
GDPR के तहत क्यों हुई कार्रवाई?
यूरोप के GDPR नियमों के तहत ऐसे ऑटोमेटेड फैसलों पर विशेष सुरक्षा दी जाती है, जिनका किसी व्यक्ति की नौकरी या आजीविका पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है। रेगुलेटर का कहना है कि ऐसे मामलों में मानवीय समीक्षा और फैसले को चुनौती देने का उचित अवसर महत्वपूर्ण है।
Uber ने क्या कहा?
Uber ने डच रेगुलेटर के फैसले से असहमति जताई है। कंपनी का कहना है कि वह ड्राइवरों के अकाउंट को स्थायी रूप से बंद करने से पहले मानवीय समीक्षा करती है और ड्राइवरों को फैसले के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी मिलता है। कंपनी ने भारी जुर्माने को अनुचित बताते हुए अपील करने की बात कही है।
मामला क्यों अहम है?
यह मामला सिर्फ Uber तक सीमित नहीं है। यह सवाल उठाता है कि कंपनियां जब AI या कंप्यूटर एल्गोरिदम की मदद से लोगों की नौकरी और आय से जुड़े फैसले लेती हैं, तो उन फैसलों में पारदर्शिता और मानवीय समीक्षा कितनी जरूरी है।