डाबर ने FSSAI पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। कंपनी का कहना है कि फूड रेगुलेटर के एक आदेश से उसके करीब ₹150 करोड़ के स्टॉक पर संकट खड़ा हो गया था। मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल डाबर को राहत देते हुए FSSAI के आदेश पर 24 अगस्त तक रोक लगा दी है।
क्या है पूरा विवाद?
FSSAI ने खाद्य उत्पादों के लेबल और विज्ञापनों में ‘100% Pure’, ‘100% Natural’ और ‘100% Organic’ जैसे दावों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। रेगुलेटर का कहना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं और Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 के प्रावधानों से जुड़े हैं।
FSSAI ने 100% क्लेम वाले उत्पादों की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया था और डाबर से 15 दिन के भीतर Action Taken Report (ATR) भी मांगी थी।
डाबर ने लगाया भेदभाव का आरोप
6 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में डाबर ने FSSAI की कार्रवाई को एकतरफा और बिना पर्याप्त विचार के जारी किया गया आदेश बताया।
कंपनी का आरोप है कि FSSAI की कार्रवाई से उसके प्रतिस्पर्धियों को फायदा पहुंच सकता है। डाबर का कहना है कि ‘100%’ क्लेम का इस्तेमाल इंडस्ट्री में सामान्य तौर पर होता है और उसके कई उत्पादों पर इस तरह का दावा स्वतंत्र रूप से किया जाता है।
कंपनी ने यह भी कहा कि आदेश जारी करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया।
₹150 करोड़ की इन्वेंट्री पर संकट
डाबर के मुताबिक, FSSAI के आदेश से उसके 11 प्रमुख उत्पाद प्रभावित हुए हैं। इनमें डाबर हनी, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल और Real Activ Coconut Water जैसे उत्पाद शामिल हैं।
कंपनी का दावा है कि करीब ₹150 करोड़ की इन्वेंट्री पर असर पड़ सकता था। डाबर ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ऐसे उत्पाद भी कार्रवाई की सूची में शामिल किए गए जिनके लेबल पर ‘100%’ क्लेम था ही नहीं।
दिल्ली हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी और FSSAI के आदेश पर 24 अगस्त तक स्टे लगा दिया।
अदालत ने माना कि इस तरह का निर्देश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था। अब अगली सुनवाई में मामले पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
क्विक-कॉमर्स और होटल सप्लाई पर भी असर
FSSAI की कार्रवाई सार्वजनिक होने के बाद डाबर की सप्लाई चेन पर भी असर पड़ने लगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ रिटेल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने प्रभावित उत्पादों को लेकर सावधानी बरती।
कंपनी के अनुसार, क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit ने कुछ उत्पादों की लिस्टिंग को लेकर कार्रवाई की थी। वहीं कुछ हॉस्पिटैलिटी कंपनियों ने भी विवाद सुलझने तक प्रभावित उत्पादों की सप्लाई रोकने पर विचार किया।
डाबर पहले ही बदल रही थी लेबल
डाबर का कहना है कि उसने FSSAI की आपत्तियों के बाद कई उत्पादों के लेबल से ‘100%’ क्लेम हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी थी।
कंपनी के मुताबिक, कई उत्पादों के नए लेबल तैयार किए जा चुके हैं और कुछ पर बदलाव की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट की अंतरिम राहत के बाद डाबर को कुछ समय के लिए राहत मिली है। 24 अगस्त की सुनवाई में अदालत मामले पर आगे का फैसला कर सकती है।
इस विवाद का असर सिर्फ डाबर तक सीमित नहीं माना जा रहा, क्योंकि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में ‘100%’ जैसे दावों के इस्तेमाल को लेकर FSSAI की सख्ती का असर दूसरी FMCG कंपनियों पर भी पड़ सकता है।