Home आज की ख़ास ख़बर बुढ़ापे में बीमारी का डर: मामूली दर्द भी हार्ट अटैक लगता है, टेस्ट में कुछ नहीं आता, लेकिन डर नहीं जाता; क्या करें?

बुढ़ापे में बीमारी का डर: मामूली दर्द भी हार्ट अटैक लगता है, टेस्ट में कुछ नहीं आता, लेकिन डर नहीं जाता; क्या करें?

0
बुढ़ापे में बीमारी का डर: मामूली दर्द भी हार्ट अटैक लगता है, टेस्ट में कुछ नहीं आता, लेकिन डर नहीं जाता; क्या करें?
Health anxiety in old age can make normal body pain feel like a serious heart problem. Understanding symptoms and staying calm is important for better mental and physical health.

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में छोटे-मोटे बदलाव आना सामान्य है। कभी सीने में हल्का दर्द, सांस फूलना, थकान या शरीर में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन कई बुजुर्गों में इन सामान्य लक्षणों को लेकर डर इतना बढ़ जाता है कि उन्हें हर बार लगता है कि कहीं हार्ट अटैक तो नहीं आ रहा।

कई बार जांच कराने के बाद भी रिपोर्ट सामान्य आती है, डॉक्टर भी कोई गंभीर बीमारी नहीं बताते, लेकिन मन में बैठा डर खत्म नहीं होता। इस स्थिति को हेल्थ एंग्जायटी (Health Anxiety) कहा जाता है।

क्यों बढ़ जाता है बीमारी का डर?

उम्र बढ़ने के साथ लोगों को अपनी सेहत को लेकर चिंता ज्यादा होने लगती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं—

  • शरीर में होने वाले छोटे बदलावों को गंभीर बीमारी समझ लेना।
  • पहले किसी करीबी को गंभीर बीमारी होने का अनुभव।
  • अकेलापन और ज्यादा समय तक बीमारी के बारे में सोचना।
  • इंटरनेट पर लक्षण खोजकर खुद बीमारी का अंदाजा लगाना।
  • पहले हुए किसी स्वास्थ्य संकट का डर मन में रह जाना।

हर दर्द हार्ट अटैक नहीं होता

डॉक्टरों के अनुसार सीने में हर दर्द दिल की बीमारी का संकेत नहीं होता। कई बार गैस, मांसपेशियों में खिंचाव, तनाव या चिंता के कारण भी सीने में भारीपन महसूस हो सकता है।

हालांकि, अगर सीने में तेज दर्द, सांस लेने में परेशानी, पसीना आना, चक्कर आना या दर्द का हाथ-जांघ तक फैलना जैसे लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बार-बार टेस्ट कराने से भी नहीं जाता डर

कुछ लोग बार-बार ECG, ब्लड टेस्ट या दूसरी जांच करवाते हैं। रिपोर्ट सामान्य आने के बाद कुछ समय के लिए राहत मिलती है, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वही डर वापस आ जाता है।

ऐसे मामलों में सिर्फ बीमारी की जांच नहीं, बल्कि डर और चिंता को समझना भी जरूरी होता है।

हेल्थ एंग्जायटी कम करने के तरीके

1. शरीर के हर संकेत को बीमारी न समझें
हल्का दर्द या थकान शरीर का सामान्य हिस्सा हो सकता है।

2. इंटरनेट पर लक्षण खोजने से बचें
बार-बार बीमारी के बारे में पढ़ने से चिंता बढ़ सकती है।

3. रोज थोड़ी शारीरिक गतिविधि करें
टहलना, योग और हल्की एक्सरसाइज तनाव कम करने में मदद करती है।

4. परिवार और दोस्तों से बात करें
अपनी चिंता को मन में दबाकर रखने से डर बढ़ सकता है।

5. डॉक्टर की सलाह पर भरोसा रखें
अगर जांच सामान्य है और डॉक्टर ने गंभीर समस्या नहीं बताई है, तो उस पर विश्वास करना जरूरी है।

6. ध्यान और सांस की एक्सरसाइज करें
मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग चिंता को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।

कब डॉक्टर से सलाह जरूर लें?

अगर बीमारी का डर इतना बढ़ जाए कि रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, नींद खराब हो जाए या बार-बार अस्पताल जाने की जरूरत महसूस हो, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।

उम्र बढ़ना बीमारी का संकेत नहीं है। सही जानकारी, नियमित जांच और सकारात्मक सोच के साथ बुजुर्ग स्वस्थ और बेहतर जीवन जी सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here