Donald Trump Election Claim: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। चुनाव सुरक्षा पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने आरोप लगाया कि उस चुनाव में धांधली हुई थी और विदेशी ताकतों ने अमेरिकी वोटर्स के डेटा को निशाना बनाया था।
ट्रम्प ने कहा कि उनकी सरकार चुनाव सुरक्षा से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक (डिक्लासिफाई) कर रही है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि चीन ने 2020 के चुनाव के दौरान करीब 22 करोड़ अमेरिकी वोटर्स का डेटा चुराया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 18 राज्यों का वोटर डेटा हैक किया गया और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इसकी जानकारी थी, लेकिन इसे राष्ट्रपति, कांग्रेस और आम जनता से छिपाया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कई जांचों, ऑडिट, पुनर्गणना और अदालतों की सुनवाई में 2020 चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली के ठोस सबूत नहीं मिले थे।
ट्रम्प के चुनाव सुरक्षा संबोधन की 5 बड़ी बातें
1. 2.78 लाख गैर-नागरिक वोटर्स का दावा
ट्रम्प ने दावा किया कि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) की जांच में करीब 2.78 लाख गैर-अमेरिकी नागरिक संघीय चुनावों के लिए वोटर के रूप में रजिस्टर्ड पाए गए। उन्होंने कहा कि वास्तविक संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है।
2. वोटिंग सिस्टम पर उठाए सवाल
ट्रम्प ने अमेरिकी वोटिंग मशीनों, वोटर डेटाबेस और बैलेट काउंटिंग सिस्टम को साइबर हमलों के लिए संवेदनशील बताया। उन्होंने रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया को संभावित खतरा बताया।
3. जांच और कार्रवाई के निर्देश
ट्रम्प ने चुनाव सुरक्षा दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के साथ DNI, FBI, CIA और न्याय विभाग को जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर कानूनी कदम उठाने की बात कही।
4. मीडिया पर लगाए आरोप
ट्रम्प ने NBC और ABC जैसे मीडिया संस्थानों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ मीडिया संगठन चुनाव से जुड़े मुद्दों को सामने नहीं आने देना चाहते।
5. चुनाव सिस्टम में सुधार की मांग
ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका को दुनिया का सबसे सुरक्षित और निष्पक्ष चुनाव सिस्टम बनाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था को लेकर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है।
अब इस पूरे मामले को लेकर अमेरिका में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां ट्रम्प समर्थक इसे चुनाव सुरक्षा का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं आलोचक उनके दावों के सबूतों पर सवाल उठा रहे हैं।