राजस्थान में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD), परमिट व्यवस्था और ई-डिटेक्शन चालानों के विरोध में ट्रांसपोर्टरों ने रविवार रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेशभर में करीब 10 हजार ट्रकों का संचालन बंद कर दिया गया है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस हड़ताल को प्रदेश के कई बड़े ट्रांसपोर्ट संगठनों का समर्थन मिला है। लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन (LTOA), जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन, विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, जयपुर परचून ट्रांसपोर्ट यूनियन और ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन समेत कई संगठनों ने आंदोलन में भाग लेने की घोषणा की है।
इन मुद्दों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन
राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति ने तीन प्रमुख मांगों को लेकर चक्का जाम शुरू किया है। इनमें व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) की उपलब्धता, परमिट से जुड़ी समस्याएं और ई-डिटेक्शन के जरिए हो रहे चालान शामिल हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्टरों की मांग है कि प्रदेश के सभी जिलों में वाहन फिटनेस सेंटर खोले जाएं, ताकि वाहन मालिकों को दूसरे शहरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
VLTD का नहीं, खराब व्यवस्था का विरोध
विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश चौधरी ने बताया कि ट्रांसपोर्टर VLTD सिस्टम के विरोध में नहीं हैं, लेकिन सरकार ने इसे अनिवार्य करने के बावजूद पर्याप्त डिवाइस उपलब्ध नहीं कराई हैं। इसके कारण हजारों ट्रकों के फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट और अन्य जरूरी काम अटक गए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार पहले सभी अधिकृत कंपनियों के पास पर्याप्त संख्या में डिवाइस उपलब्ध कराए और व्यवस्था को आसान बनाए, उसके बाद ही नियमों को सख्ती से लागू किया जाए।
परमिट और टैक्स व्यवस्था से बढ़ी परेशानी
ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि लंबी दूरी तक माल ढुलाई करने वाले ट्रकों को अलग-अलग राज्यों में भारी टैक्स और परमिट शुल्क देना पड़ता है। राजस्थान से केरल, चेन्नई, गुवाहाटी और अन्य राज्यों में जाने वाले ट्रकों के लिए यह खर्च कई बार माल भाड़े के बराबर पहुंच जाता है।
इसके अलावा, ई-डिटेक्शन चालानों के कारण भी वाहन मालिकों और ड्राइवरों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
कई संगठनों ने दिया समर्थन
लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन (LTOA) के अध्यक्ष अनिल आनंद और महासचिव नवीन शर्मा ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि बढ़ते खर्च, अव्यावहारिक नियमों और प्रशासनिक उदासीनता के कारण ट्रांसपोर्ट कारोबार संकट में है।
ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन और जयपुर के कई ट्रांसपोर्ट संगठनों ने भी सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
सप्लाई चेन पर पड़ सकता है असर
ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति का दावा है कि इस हड़ताल में प्रदेशभर के करीब 10 हजार ट्रक शामिल हैं। यदि सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच जल्द सहमति नहीं बनती है, तो सीमेंट, स्टील, किराना, कृषि उपज और अन्य जरूरी सामानों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
ट्रांसपोर्टरों ने सरकार से जल्द वार्ता कर स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ताकि प्रदेश में परिवहन व्यवस्था सामान्य हो सके।