राजस्थान के सिरोही जिले से बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर मामला सामने आया है। जिले में संचालित एक निजी हॉस्टल में रहने वाले 6 मासूम बच्चों के साथ कथित यौन शोषण की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया। पूरे मामले का खुलासा एक गुमनाम ईमेल के जरिए हुआ, जिसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल कल्याण समिति और पुलिस की संयुक्त टीम ने हॉस्टल में अचानक छापा मारा।
प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने पर हॉस्टल संचालक और वार्डन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने वार्डन को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। उसके खिलाफ POCSO एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
बच्चों ने गोपनीय पूछताछ में सुनाई दर्दभरी कहानी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सावित्री आनंद ने बताया कि हॉस्टल में रहने वाले बच्चों की उम्र 5 से 11 वर्ष के बीच है। जांच टीम ने बच्चों से अलग-अलग और गोपनीय तरीके से बातचीत की, जिसमें 6 बच्चों ने वार्डन पर यौन शोषण के आरोप लगाए।
शिकायत सामने आने के बाद सभी 30 बच्चों को प्रशासन की निगरानी में रखा गया है। एक पीड़ित बच्चे का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है, जबकि अन्य बच्चों का भी मेडिकल कराया जा रहा है।
सीसीटीवी फुटेज और कंप्यूटर जब्त
जांच के दौरान पुलिस ने हॉस्टल से दो कंप्यूटर और पिछले एक सप्ताह की CCTV फुटेज जब्त की है। अब इनकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि मामले से जुड़े सभी सबूत जुटाए जा सकें।
बिना अनुमति चल रहा था हॉस्टल
जांच में यह भी सामने आया कि हॉस्टल का वैध रजिस्ट्रेशन नहीं था। अधिकारियों को बच्चों से ली गई फीस की रसीदें, उपस्थिति रजिस्टर और कर्मचारियों के वेतन से जुड़े दस्तावेज भी नहीं मिले।
प्रशासन का मानना है कि हॉस्टल लंबे समय से बिना आवश्यक अनुमति और नियमों का पालन किए संचालित किया जा रहा था।
लालच देकर करता था गलत हरकतें
बच्चों ने पूछताछ में यह भी बताया कि वार्डन उन्हें घड़ियां, क्रिकेट का सामान और अन्य उपहार देने का लालच देकर अपने पास बुलाता था और कथित तौर पर गलत हरकतें करता था।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं बच्चों को लंबे समय से इसी तरह प्रलोभन देकर शोषण का शिकार तो नहीं बनाया जा रहा था।
विशेष जांच टीम गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है।
सीओ मुकेश चौधरी ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिला प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़ी एजेंसियां बच्चों की काउंसलिंग और सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटी हुई हैं।