नई दिल्ली (लाइफस्टाइल डेस्क): आज रात आसमान में एक बेहद खास नजारा देखने को मिलेगा। यह इस महीने की पूर्णिमा है, जिसे “स्ट्रॉबेरी मून” कहा जाता है। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह रात खास मानी जा रही है।
हालांकि लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आज चांद सच में गुलाबी या लाल दिखेगा? आइए जानते हैं इसकी असली कहानी।
क्या सच में गुलाबी दिखेगा चांद?
“स्ट्रॉबेरी मून” नाम सुनकर ऐसा लगता है कि चांद का रंग स्ट्रॉबेरी जैसा लाल या गुलाबी होगा, लेकिन ऐसा नहीं होता।
यह नाम चांद के रंग से नहीं, बल्कि एक परंपरा से जुड़ा है।
स्ट्रॉबेरी मून नाम कहां से आया?
यह नाम उत्तर-पूर्वी अमेरिका की Algonquin tribes से जुड़ा हुआ है। जून का महीना वहां स्ट्रॉबेरी की फसल के पकने का समय होता है।
इसलिए जून की पूर्णिमा को “Strawberry Moon” कहा जाने लगा। धीरे-धीरे यह नाम दुनियाभर में लोकप्रिय हो गया।
क्या इस बार स्ट्रॉबेरी मून खास है?
इस साल की पूर्णिमा एक और वजह से खास मानी जा रही है। यह 21 जून के समर सोल्सटिस (गर्मी का सबसे लंबा दिन) के बाद पहली पूर्णिमा है।
इस वजह से चांद आकाश में थोड़ा नीचे दिखाई देगा और रातभर दक्षिणी क्षितिज के पास नजर आएगा।
भारत में कब दिखेगा स्ट्रॉबेरी मून?
भारत में पूर्णिमा का सबसे सुंदर दृश्य 30 जून सुबह 5:27 बजे के आसपास होगा।
हालांकि, इसे आप 29 जून की शाम को चंद्रोदय के बाद भी देख सकते हैं।
👉 इसे देखने के लिए किसी टेलीस्कोप की जरूरत नहीं है
👉 साफ आसमान और कम रोशनी वाली जगह सबसे बेहतर होगी
कैसे देखें सबसे अच्छा नजारा?
अगर आप इस खूबसूरत खगोलीय घटना का आनंद लेना चाहते हैं तो:
- शहर की रोशनी से दूर जाएं
- खुला आसमान चुनें
- सूरज ढलने के बाद दक्षिण दिशा की ओर देखें
- धैर्य के साथ चांद को उगते देखें
निष्कर्ष
“स्ट्रॉबेरी मून” नाम भले ही रोमांचक लगे, लेकिन यह चांद के रंग से जुड़ा नहीं है। यह एक पारंपरिक नाम है जो फसल और मौसम के बदलाव को दर्शाता है। इस रात का असली आनंद चांद की चमक और शांत आसमान में छिपा है।