Home आज की ख़ास ख़बर पुणे में हैवानियत का ‘द एंड’: 3 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाले 65 साल के भीमराव को फांसी, 60 दिन में आया डेथ वारंट

पुणे में हैवानियत का ‘द एंड’: 3 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाले 65 साल के भीमराव को फांसी, 60 दिन में आया डेथ वारंट

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पुणे में हैवानियत का ‘द एंड’: 3 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाले 65 साल के भीमराव को फांसी, 60 दिन में आया डेथ वारंट
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने महज 2 महीने के भीतर 82 गवाहों और अकाट्य डीएनए (DNA) सबूतों के आधार पर मासूम के कातिल भीमराव कांबले को मौत का फरमान सुनाया। कानून के इस सख्त रुख पर आपकी क्या राय है? कमेंट में बताएं।

महाराष्ट्र के पुणे से न्याय व्यवस्था की एक ऐसी नजीर सामने आई है, जिसने समाज में कानून के प्रति विश्वास को और मजबूत कर दिया है। पुणे की एक विशेष अदालत (Special Court) ने महज 3 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी नृशंस हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने 65 वर्षीय दोषी भीमराव कांबले को उसके घिनौने कृत्य के लिए फांसी की सजा (Death Penalty) मुकर्रर की है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. आर. सालुंखे ने मामले की गंभीरता और दोषी की विकृत मानसिकता को देखते हुए इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ माना और आरोपी को सीधे मौत का फरमान सुनाया।

1 मई को क्या हुआ था? (पूरी घटना)

यह खौफनाक वारदात पुणे जिले के नसरापुर गांव में 1 मई 2026 को घटित हुई थी। 65 साल के बुजुर्ग भीमराव कांबले ने पड़ोस में रहने वाली तीन साल की बच्ची को बहलाया-फुसलाया। उसने बच्ची को स्नैक्स (खाने-पीने की चीज) देने और गाय का नया बछड़ा दिखाने का लालच दिया। इसके बाद वह मासूम को मवेशियों के तबेले के पास एक सुनसान शेड में ले गया, जहाँ उसने बच्ची के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं और बाद में उसकी गला दबाकर हत्या कर दी।

गुस्से में उबल पड़ा था महाराष्ट्र

इस घटना के उजागर होते ही पूरे महाराष्ट्र में भारी जन आक्रोश देखने को मिला था। लोगों ने न्याय की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किए थे और मुंबई-बेंगलुरु हाईवे को घंटों तक जाम रखा था। जनता के भारी दबाव और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था।

39 मिनट का टॉर्चर और 18 जख्म: हिला देने वाली मेडिकल रिपोर्ट

स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर (सरकारी वकील) अजय मिसार ने कोर्ट में दलीलें पेश करते हुए बताया कि मासूम बच्ची के साथ करीब 39 मिनट तक बर्बरता की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, बच्ची के नाजुक शरीर पर 18 गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। आरोपी ने न सिर्फ बलात्कार किया बल्कि अप्राकृतिक तरीके से भी बच्ची का शारीरिक शोषण किया था।

अदालत में ऐसे ढेर हुए आरोपी के झूठे दावे

सुनवाई के दौरान आरोपी भीमराव कांबले ने खुद को बेकसूर बताते हुए एक मनगढ़ंत कहानी गढ़ी। उसने कहा कि वह बच्ची को गोदी में उठाकर बछड़ा दिखा रहा था, तभी उसका पैर फिसल गया और गिरने की वजह से बच्ची को चोटें आईं। हालांकि, अदालत के सामने वैज्ञानिक और फोरेंसिक सबूतों ने उसके इस झूठ की धज्जियां उड़ा दीं।

इन सबूतों के आधार पर मिली सजा:

  • डीएनए रिपोर्ट: बच्ची के शरीर और घटनास्थल से मिले आरोपी के डीएनए सैंपल मैच हो गए।
  • सीसीटीवी फुटेज: आरोपी बच्ची को बहलाकर ले जाते हुए कैमरे में कैद हुआ था।
  • गवाहों के बयान: इस केस में अभियोजन पक्ष ने कुल 82 गवाहों को कोर्ट में पेश किया, जिन्होंने आरोपी के खिलाफ गवाही दी।

सुधार की कोई गुंजाइश नहीं: कोर्ट

सरकारी वकील ने अदालत को अवगत कराया कि भीमराव कांबले एक आदतन अपराधी है और वह पहले भी इस तरह की घिनौनी वारदातों को अंजाम दे चुका है। ऐसे समाज कंटक में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है। पीड़ित पिता ने भी कोर्ट से आरोपी के लिए सिर्फ और सिर्फ फांसी की मांग की थी।

सभी पक्षों को सुनने और सबूतों को देखने के बाद कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट (POCSO Act), अपहरण, दुष्कर्म और हत्या की विभिन्न धाराओं के तहत भीमराव कांबले को दोषी करार देते हुए फांसी का सीधा डेथ वारंट जारी कर दिया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी कोर्ट के इस त्वरित और सख्त फैसले की सराहना की है।

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