अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया बातचीत के बाद ईरानी कच्चे तेल (Crude Oil) पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी गई है। इसके बाद लगभग 8 साल बाद ईरान एक बार फिर वैश्विक बाजार में अपना तेल बेचने की स्थिति में आ गया है।
इस फैसले के बाद ग्लोबल ऑयल सप्लाई बढ़ने लगी है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है।
ईरान के पास कितना बड़ा तेल भंडार?
ईरान के पास लगभग 208–209 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार है, जो दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा माना जाता है। वैश्विक तेल भंडार में इसकी हिस्सेदारी करीब 12% तक है। यही कारण है कि ईरानी तेल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग रहती है।
ग्लोबल मार्केट पर असर
ईरानी तेल के बाजार में लौटने से कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ेगी, जिससे कीमतों में गिरावट का दबाव बनेगा।
- ब्रेंट क्रूड 78 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आया
- WTI क्रूड करीब 2.7% गिरकर 73 डॉलर प्रति बैरल पर
- पिछले कुछ दिनों में 5% तक गिरावट दर्ज
विशेषज्ञों के अनुसार सप्लाई बढ़ने से आगे भी कीमतों में नरमी रह सकती है।
भारत को क्या फायदा होगा?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है और ईरान से तेल लेना पहले भी सस्ता विकल्प माना जाता रहा है।
भारत को संभावित फायदे:
- सस्ते कच्चे तेल की उपलब्धता
- शिपिंग और लॉजिस्टिक लागत में कमी
- रिफाइनरियों के लिए बेहतर ग्रेड का क्रूड
- मोलभाव की बेहतर स्थिति
भारत 2018 से पहले अपने कुल तेल आयात का लगभग 10–12% ईरान से लेता था।
क्या घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे रहती हैं तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। हालांकि भारत में रिटेल दाम कई अन्य टैक्स और फैक्टर्स पर भी निर्भर करते हैं, इसलिए तुरंत बड़ी कटौती की संभावना सीमित है।
अब भी चुनौतियां बाकी
हालांकि ईरानी तेल पर छूट दी गई है, लेकिन कुछ मुद्दे अभी भी बने हुए हैं:
- यूरोपीय देशों के प्रतिबंध
- शिपिंग और इंश्योरेंस की समस्याएं
- “डार्क फ्लीट” से जुड़ी जटिलताएं
- बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम की सीमाएं
निष्कर्ष
ईरानी तेल की वैश्विक बाजार में वापसी से एनर्जी सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत जैसे आयातक देशों के लिए यह राहत की खबर है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दामों में वास्तविक गिरावट बाजार की आगे की स्थिरता पर निर्भर करेगी।