उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित एक एनिमेशन संस्थान में लगी भीषण आग ने 15 युवकों की जान ले ली, जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस दर्दनाक हादसे के बाद भवन से जुड़ी पुरानी फाइलों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में ही अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण (Demolition) का आदेश जारी किया गया था। हैरानी की बात यह है कि यह आदेश दो महीने के भीतर ही रद्द कर दिया गया था। अब सवाल उठ रहा है कि अगर उस समय कार्रवाई हो जाती, तो क्या यह बड़ा हादसा टल सकता था?
1980 में हुआ था भवन का आवंटन
अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या MS-102-D का आवंटन वर्ष 1980 में लॉटरी प्रणाली के तहत किया गया था। बाद में यह संपत्ति कई बार मालिकाना बदलाव से गुजरी और वर्ष 2014 में नए मालिकों के नाम दर्ज हुई।
करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था, लेकिन बाद में यहां अनधिकृत निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों की शिकायतें सामने आईं।
2016 में आया था ध्वस्तीकरण आदेश
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने अवैध निर्माण के आरोपों के चलते वर्ष 2016 में भवन मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच के बाद 10 मई 2016 को इमारत को गिराने का आदेश जारी किया गया।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि महज दो महीने बाद 5 जुलाई 2016 को यह आदेश निरस्त कर दिया गया। अब यही फैसला जांच और बहस का केंद्र बन गया है।
शिकायतें होती रहीं, कार्रवाई नहीं हुई
सूत्रों के अनुसार भवन में अवैध निर्माण को लेकर कई बार नोटिस जारी किए गए थे। शिकायतें भी दर्ज हुईं, फाइलें चलीं और जांच हुई, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
बताया जा रहा है कि पिछले 12 वर्षों से यह निर्माण बिना किसी प्रभावी रोक-टोक के खड़ा रहा और इसमें लगातार व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती रहीं।
30 अधिकारियों की भूमिका की जांच
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच लगभग 30 अधिकारी, इंजीनियर, जोनल अधिकारी और अन्य जिम्मेदार कर्मचारी इस क्षेत्र में तैनात रहे। अब प्रशासन उनकी भूमिका और लापरवाही की जांच कर रहा है।
हादसे के बाद कई सवाल
इस दर्दनाक घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भवन के खिलाफ पहले से कार्रवाई के आदेश मौजूद थे, तो फिर उन्हें लागू क्यों नहीं किया गया? क्या प्रशासनिक लापरवाही ने 15 युवाओं की जान ले ली?
फिलहाल हादसे की जांच जारी है और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है।