कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जल्द इस्तीफा दे सकते हैं और उनकी जगह डिप्टी CM डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंपी जा सकती है। दिल्ली में हुई हाई लेवल बैठक के बाद सियासी अटकलें और तेज हो गई हैं।
दिल्ली में 6 घंटे चली बड़ी बैठक
मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबी बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक बैठक में कर्नाटक नेतृत्व परिवर्तन पर गंभीर चर्चा हुई।
बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने और राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव रखा है।
सिद्धारमैया ने पहले किया विरोध
सूत्रों के अनुसार शुरुआत में सिद्धारमैया ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया था। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को साफ संकेत दिया कि अगर उन्हें हटाया गया तो कई विधायक उनके साथ जा सकते हैं।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे डीके शिवकुमार के नेतृत्व में काम नहीं करना चाहते।
डीके शिवकुमार की बढ़ सकती है ताकत
कांग्रेस के अंदर लंबे समय से यह चर्चा चल रही है कि 2023 में सरकार बनने के दौरान मुख्यमंत्री पद को लेकर ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला तय हुआ था। शिवकुमार समर्थक अब उसी समझौते का हवाला दे रहे हैं।
माना जा रहा है कि पार्टी 2028 विधानसभा चुनाव से पहले नया चेहरा लाकर सत्ता विरोधी माहौल को कम करना चाहती है।
सिद्धारमैया के बेटे को मिल सकती है जिम्मेदारी
सूत्रों का दावा है कि पार्टी सिद्धारमैया खेमे को शांत रखने के लिए उनके बेटे को मंत्री पद दे सकती है। कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता कि बदलाव के बाद पार्टी में किसी तरह की बगावत हो।
ब्रेकफास्ट मीटिंग से बढ़ी हलचल
गुरुवार सुबह सिद्धारमैया ने मंत्रियों की ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई है। इसी बैठक के बाद उनके इस्तीफे की अटकलें और तेज हो गई हैं।
हालांकि कांग्रेस नेताओं ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी बदलाव की पुष्टि नहीं की है।
अब आगे क्या?
कर्नाटक में आने वाले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं। अगर नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो यह कांग्रेस की दक्षिण भारत की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। फिलहाल सबकी नजर दिल्ली हाईकमान और गुरुवार की बैठकों पर टिकी हुई है।