काठमांडू/बीजिंग: नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ से प्रभावित इलाके में पहली बार अंतरराष्ट्रीय मीडिया को जाने की अनुमति दी गई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने रविवार को रॉयटर्स समेत कई विदेशी मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग का दौरा कराया।
यह वही इलाका है, जो 26 अगस्त को पानी, कीचड़ और मलबे की तेज लहर की चपेट में आया था। अचानक आई बाढ़ ने सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए।
पहली बार विदेशी पत्रकारों को मिला प्रवेश
आपदा के बाद प्रभावित इलाके तक अंतरराष्ट्रीय मीडिया की पहुंच नहीं हो पाई थी। अब चीन के विदेश मंत्रालय की व्यवस्था के तहत रॉयटर्स समेत कई विदेशी मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग का दौरा कराया गया।
पत्रकारों ने बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया और आपदा के बाद वहां की स्थिति को देखा। इससे प्रभावित इलाकों में हुई तबाही और राहत-बचाव की स्थिति की तस्वीर दुनिया के सामने आने की संभावना है।
1,300 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा
जानकारी के मुताबिक, चीन और नेपाल को मिलाकर इस आपदा में 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
ग्लेशियर टूटने के बाद पानी, कीचड़ और मलबे की तेज लहरों ने सीमा क्षेत्र के कई इलाकों को प्रभावित किया। आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान चलाए गए, जबकि लापता लोगों की तलाश भी जारी है।
इंटरनेशनल मीडिया को प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश मिलने के बाद अब हादसे के असर और वहां की मौजूदा स्थिति की विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।