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कभी दुनिया की नंबर-1 रियल एस्टेट कंपनी, अब दिवालिया; फाउंडर को उम्रकैद

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कभी दुनिया की नंबर-1 रियल एस्टेट कंपनी, अब दिवालिया; फाउंडर को उम्रकैद
China’s Evergrande, once one of the world’s biggest real estate companies, has been declared bankrupt amid massive debt. Founder Hui Ka Yan has also been sentenced to life imprisonment in a financial fraud case.

चीन की दिग्गज रियल एस्टेट कंपनी एवरग्रैंड को कोर्ट ने दिवालिया घोषित कर दिया है। कभी दुनिया की सबसे बड़ी और मूल्यवान रियल एस्टेट कंपनियों में शामिल रही एवरग्रैंड भारी कर्ज के बोझ तले इस स्थिति तक पहुंची। कंपनी पर करीब 300 अरब डॉलर यानी लगभग 28 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बताया गया है।

कंपनी के संस्थापक हुई का यान को भी वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य मामलों में दोषी ठहराया गया है। अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उनकी संपत्ति जब्त करने और कंपनी से जुड़ी अन्य कार्रवाई के आदेश भी दिए गए हैं।

गरीब परिवार से चीन के सबसे अमीर लोगों में शामिल हुए हुई का यान

हुई का यान ने एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर चीन के बड़े कारोबारी साम्राज्य की नींव रखी। उनकी कंपनी एवरग्रैंड ने तेजी से फैलते चीनी शहरों में बड़े पैमाने पर आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट शुरू किए।

कंपनी का कारोबार केवल रियल एस्टेट तक सीमित नहीं रहा। एवरग्रैंड ने फुटबॉल क्लब समेत कई दूसरे क्षेत्रों में भी निवेश किया और देखते ही देखते चीन के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल हो गई।

कर्ज के सहारे तेजी से बढ़ा कारोबार

एवरग्रैंड का बिजनेस मॉडल बड़े पैमाने पर कर्ज और एडवांस बुकिंग पर आधारित था। कंपनी जमीन खरीदती, प्रोजेक्ट शुरू करती और निर्माण पूरा होने से पहले ही ग्राहकों को फ्लैट बेचकर पैसा जुटाती थी। इसी रकम का इस्तेमाल नए प्रोजेक्ट शुरू करने में किया जाता था।

शुरुआत में यह मॉडल तेजी से काम करता रहा, लेकिन कंपनी का कर्ज लगातार बढ़ता गया। जब चीन सरकार ने रियल एस्टेट कंपनियों के लिए कर्ज से जुड़े नियम सख्त किए, तो एवरग्रैंड के लिए नई फंडिंग जुटाना मुश्किल हो गया।

1,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट और भारी देनदारियां

एवरग्रैंड का कारोबार चीन के करीब 280 शहरों तक फैला था। कंपनी से जुड़े लगभग 1,300 प्रोजेक्ट अधूरे रह गए। बढ़ते कर्ज और नकदी संकट के कारण कंपनी अपने प्रोजेक्ट पूरे करने और देनदारियां चुकाने में असमर्थ होती चली गई।

कंपनी के शेयरों की ट्रेडिंग लंबे समय तक बंद रही और बाद में उन्हें हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट कर दिया गया। इससे एवरग्रैंड के सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी के रूप में अस्तित्व को बड़ा झटका लगा।

कोर्ट ने क्यों माना कि कंपनी दिवालिया है?

अदालत के सामने कंपनी की वित्तीय स्थिति को लेकर यह बात सामने आई कि एवरग्रैंड अपनी देनदारियां चुकाने की स्थिति में नहीं है। कंपनी की संपत्तियां उसकी देनदारियों की तुलना में काफी कम हो चुकी थीं।

इसके बाद अदालत ने कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और उसके परिसमापन की कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया।

संस्थापक पर भी कड़ी कार्रवाई

एवरग्रैंड के संस्थापक हुई का यान के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गई। अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। उनके राजनीतिक अधिकार खत्म करने और निजी संपत्ति जब्त करने के आदेश भी दिए गए।

कंपनी और उससे जुड़ी संस्थाओं पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है।

कभी दुनिया की सबसे मूल्यवान रियल एस्टेट कंपनी थी

एवरग्रैंड ने चीन में रियल एस्टेट बूम के दौरान बेहद तेजी से विस्तार किया। 2017 के आसपास कंपनी का बाजार मूल्य करीब 400 अरब डॉलर तक पहुंच गया था और यह दुनिया की सबसे मूल्यवान रियल एस्टेट कंपनियों में शामिल हो गई थी।

लेकिन कुछ ही वर्षों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। बढ़ते कर्ज, प्रॉपर्टी मार्केट में कमजोरी और फंडिंग संकट ने कंपनी की आर्थिक स्थिति को लगातार कमजोर किया।

चीन की प्रॉपर्टी इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका

एवरग्रैंड का पतन चीन के रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय से चल रहे संकट का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। कंपनी के दिवालिया होने का असर निवेशकों, घर खरीदने वालों, कर्ज देने वाले संस्थानों और प्रॉपर्टी मार्केट से जुड़े कारोबार पर पड़ा है।

एवरग्रैंड की कहानी यह दिखाती है कि कर्ज के सहारे तेजी से बढ़ने वाला कारोबार तब गंभीर संकट में फंस सकता है, जब बाजार में मंदी आए और नई फंडिंग का रास्ता बंद हो जाए।कभी दुनिया की नंबर-1 रियल एस्टेट कंपनी, अब दिवालिया; फाउंडर को उम्रकैद

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