अगर आपको बिना सर्दी-जुकाम के भी बार-बार गला साफ करने की जरूरत महसूस होती है, गले में कुछ अटका हुआ लगता है या आवाज बार-बार बैठ जाती है, तो इसे सिर्फ सामान्य खराश समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में इसके पीछे लैरिंगोफैरिंजियल रिफ्लक्स (LPR) यानी ‘साइलेंट’ या ‘हिडन एसिडिटी’ हो सकती है।
क्या होती है हिडन एसिडिटी?
जब पेट का एसिड ऊपर की ओर फूड पाइप में आने लगता है, तो इसे गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) कहा जाता है। कुछ लोगों में यह एसिड और पेट की सामग्री गले तथा वॉयस बॉक्स तक भी पहुंच सकती है।
इसी स्थिति को LPR कहा जाता है। इसे ‘साइलेंट रिफ्लक्स’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें हर बार सीने में जलन या खट्टी डकार जैसे सामान्य एसिडिटी के लक्षण दिखाई नहीं देते।
गले में क्या-क्या लक्षण दिख सकते हैं?
हिडन एसिडिटी में कई लोगों को ये परेशानियां हो सकती हैं—
- गले में कुछ फंसा हुआ महसूस होना
- बार-बार गला साफ करने की इच्छा
- लगातार खराश या जलन
- आवाज का बैठना या भारी होना
- गले में बलगम जमा होने जैसा एहसास
- निगलने में परेशानी
- सुबह उठने पर गले में ज्यादा परेशानी
हालांकि, इन लक्षणों का कारण केवल LPR ही हो, यह जरूरी नहीं है। एलर्जी, संक्रमण और गले की दूसरी समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं।
किन लोगों में रिस्क ज्यादा हो सकता है?
अनियमित खान-पान, ज्यादा वजन, देर रात खाना, खाने के तुरंत बाद लेटना और कुछ खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन रिफ्लक्स की समस्या को बढ़ा सकता है। धूम्रपान और शराब का सेवन भी कुछ लोगों में रिफ्लक्स को बढ़ा सकता है।
बचाव के लिए क्या करें?
रात में सोने से कुछ घंटे पहले खाना खत्म करने की कोशिश करें। खाने के तुरंत बाद न लेटें और बहुत ज्यादा तला-भुना या मसालेदार भोजन लेने से बचें, खासकर अगर उससे आपको लक्षण बढ़ते महसूस होते हों।
वजन ज्यादा है तो उसे नियंत्रित करना भी मददगार हो सकता है। बार-बार या लंबे समय तक लक्षण बने रहने पर खुद से एसिडिटी की दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेना बेहतर है।
अगर निगलने में लगातार परेशानी, दर्द, खून आना, बिना वजह वजन कम होना या सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण हों, तो चिकित्सकीय जांच जरूर कराएं।