अमेरिका की एक अदालत ने गौतम अडाणी के खिलाफ चल रहे रिश्वत और धोखाधड़ी के मामले को खत्म कर दिया है। ब्रुकलिन की अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गारौफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग की केस खारिज करने की मांग को मंजूरी दे दी। यह मामला करीब दो साल पहले सामने आया था और इसमें अडाणी पर भारत में सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने की योजना में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे।
अमेरिकी अभियोजकों का आरोप था कि रिश्वत की कथित योजना के जरिए अडाणी ग्रुप की एक कंपनी को भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट का ठेका हासिल करने में मदद मिलनी थी। अडाणी ग्रुप और गौतम अडाणी ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया था।
कोर्ट के फैसले के बाद अडाणी ने क्या कहा?
मामला खत्म होने के बाद गौतम अडाणी ने सोशल मीडिया पर अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वह न्यायिक प्रक्रिया के प्रति विनम्रता और गहरे सम्मान के साथ अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं।
हालांकि, जज ने केस खत्म करने के फैसले के साथ यह स्पष्ट किया कि अदालत रिश्वत के आरोपों से जुड़े किसी वित्तीय समझौते की उपयुक्तता पर कोई राय नहीं दे रही है।
अमेरिका में मामला क्यों दर्ज हुआ था?
मामले की कथित रिश्वत योजना भारत से जुड़ी थी, लेकिन अमेरिकी निवेशकों और अमेरिकी वित्तीय बाजारों का कनेक्शन होने के कारण अमेरिकी जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की।
अडाणी ग्रीन एनर्जी ने 2021 में करीब 75 करोड़ डॉलर के बॉन्ड जारी किए थे। इनमें लगभग 17.5 करोड़ डॉलर अमेरिकी निवेशकों से जुटाए गए थे। अमेरिकी अभियोजकों का आरोप था कि निवेशकों को कंपनी की कथित रिश्वत संबंधी गतिविधियों और उससे जुड़े जोखिमों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई।
इसी आधार पर अमेरिकी अधिकारियों ने विदेशी अधिकारियों को कथित रिश्वत, निवेशकों से धोखाधड़ी और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से धोखाधड़ी से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की थी।
न्याय विभाग ने पहले ही केस खत्म करने की मांग की थी
अमेरिकी न्याय विभाग ने इससे पहले ही अदालत से इस मामले को आगे नहीं बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, मामले को कानूनी रूप से समाप्त करने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी थी। अब जज निकोलस गारौफिस के आदेश के बाद यह केस खत्म हो गया है।
10 अरब डॉलर के निवेश का भी हुआ था जिक्र
मामले की सुनवाई के दौरान अमेरिका में अडाणी ग्रुप के 10 अरब डॉलर के संभावित निवेश का भी जिक्र आया था। गौतम अडाणी ने अदालत में दिए एक एफिडेविट में कहा था कि उन्हें किसी ऐसे समझौते की जानकारी नहीं थी, जिसमें यह निवेश केस खत्म करने की शर्त के तौर पर शामिल हो।
उन्होंने यह जरूर माना था कि वह पहले अमेरिका में करीब 10 अरब डॉलर निवेश करने की बात कह चुके थे।
16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ा, फिर बनाया बड़ा कारोबारी साम्राज्य
गौतम अडाणी ने 1988 में कमोडिटी ट्रेडिंग से अपने कारोबारी सफर की शुरुआत की। इसके बाद अडाणी ग्रुप ने पोर्ट, एयरपोर्ट, बिजली, माइनिंग, ट्रांसमिशन और लॉजिस्टिक्स जैसे कई क्षेत्रों में विस्तार किया।
अमेरिकी अदालत में मामला खत्म होना अडाणी ग्रुप के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अदालत द्वारा केस खारिज किए जाने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने आरोपों को सही या गलत साबित करने वाला अलग से कोई निष्कर्ष दिया है।